देशभर में मेडिकल स्टोरों की हड़ताल, ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में 15 लाख से ज्यादा दुकानें बंद, मरीजों को हुई परेशानी
देश में ऑनलाइन दवाओं की बिक्री और बड़ी कंपनियों के बढ़ते दबदबे के विरोध में बुधवार को ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर देशभर में व्यापक हड़ताल देखी गई। इस हड़ताल के चलते 15 लाख से ज्यादा मेडिकल स्टोर बंद रहे, जिससे आम लोगों और मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।हड़ताल का मुख्य कारण ऑनलाइन फार्मेसी के बढ़ते विस्तार और बड़े कॉर्पोरेट समूहों की बाजार में बढ़ती हिस्सेदारी को बताया जा रहा है। केमिस्ट संगठनों का कहना है कि इससे छोटे और मध्यम स्तर के मेडिकल स्टोरों के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो रहा है।
हालांकि, इस बंद का असर अलग-अलग शहरों में मिलाजुला दिखाई दिया। कई स्थानों पर मेडिकल स्टोर बंद रहे, लेकिन अस्पतालों के अंदर स्थित फार्मेसी और इमरजेंसी दवा काउंटर सामान्य रूप से खुले रहे, जिससे गंभीर मरीजों को राहत मिली।पटना स्थित IGIMS अस्पताल के बाहर कई मरीज और उनके परिजन दवाओं की तलाश में परेशान नजर आए। उन्हें बाहर के मेडिकल स्टोर बंद होने के कारण आवश्यक दवाएं नहीं मिल सकीं, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ गईं।
वहीं चंडीगढ़ के PGI अस्पताल में इलाज के लिए आए कश्मीर के एक परिवार को भी दवाएं उपलब्ध नहीं हो पाईं। परिवार ने बताया कि उन्हें जरूरी दवाओं के लिए काफी परेशान होना पड़ा और कई जगह भटकना पड़ा।एक मरीज के परिजन ने कहा, “दवाएं नहीं मिल रही हैं, हमें बहुत दिक्कत हो रही है।” यह स्थिति कई अन्य मरीजों के लिए भी चिंता का कारण बनी रही।
हालांकि, राहत की बात यह है कि अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोर और इमरजेंसी दवाओं की सप्लाई पर कोई असर नहीं पड़ा है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गंभीर मरीजों की दवा व्यवस्था में किसी भी तरह की बाधा नहीं आने दी जाएगी।केमिस्ट संगठनों का कहना है कि यह हड़ताल केवल एक दिन के लिए है और इसका उद्देश्य सरकार का ध्यान छोटे व्यापारियों की समस्याओं की ओर आकर्षित करना है। उनका आरोप है कि ऑनलाइन दवा बिक्री के बढ़ते चलन से पारंपरिक मेडिकल स्टोरों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। इस बीच मरीजों और उनके परिवारों को असुविधा का सामना करना पड़ा, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि हड़ताल खत्म होने के बाद स्थिति सामान्य हो जाएगी।