सत्य निकेतन हादसे से सबक, दिल्ली में बनेगी अपनी डिजास्टर फोर्स; 1100 जवान होंगे तैनात
नई दिल्ली में सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने आपदा प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। राजधानी में अब अपनी स्टेट डिजास्टर इमरजेंसी रिलीफ फोर्स (SDERF) गठित की जाएगी। इस फोर्स में करीब 1,100 जवान होंगे, जिन्हें आपदा और आपात स्थिति में तेजी से राहत एवं बचाव अभियान चलाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य ऐसी घटनाओं में बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता कम करना और मौके पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद तेज हुई प्रक्रिया
सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने की घटना में सात लोगों की मौत हुई थी। हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) समेत कई एजेंसियां जुटी थीं। इसी घटना के बाद दिल्ली में एक समर्पित आपदा प्रतिक्रिया बल की जरूरत को लेकर सरकार ने प्रक्रिया तेज की है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की NDRF के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में दिल्ली के लिए अपनी आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था तैयार करने को लेकर जरूरी जानकारियां जुटाई गईं। सरकार का कहना है कि नई फोर्स प्राकृतिक और मानवजनित दोनों तरह की आपदाओं से निपटने में अहम भूमिका निभाएगी।
1100 जवानों को मिलेगी विशेष ट्रेनिंग
प्रस्तावित फोर्स में करीब 1,100 कर्मियों को शामिल किया जाएगा। इन्हें आपदा प्रबंधन, रेस्क्यू ऑपरेशन और आपातकालीन प्रतिक्रिया की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। इसका मकसद यह है कि भूकंप, बाढ़, इमारत ढहने जैसी घटनाओं में प्रशिक्षित टीम कम से कम समय में प्रभावित इलाके तक पहुंच सके और राहत-बचाव शुरू कर सके।
इसके अलावा दिल्ली फायर सर्विस के कर्मचारियों और सिविल डिफेंस वालंटियर्स को भी विशेष आपदा प्रतिक्रिया प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे राजधानी में पहले से मौजूद आपातकालीन तंत्र और नई फोर्स के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी।
NDRF पर निर्भरता होगी कम
अभी बड़ी आपदाओं और जटिल बचाव अभियानों में दिल्ली को NDRF समेत दूसरी एजेंसियों की सहायता लेनी पड़ती है। अपनी समर्पित फोर्स बनने के बाद स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित जवानों की उपलब्धता बढ़ेगी और शुरुआती प्रतिक्रिया का समय कम किया जा सकेगा। सरकार की योजना राजधानी में प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ इमारत गिरने जैसी मानवजनित आपात स्थितियों से निपटने की क्षमता को मजबूत करने की है।
सत्य निकेतन हादसे ने राजधानी में आपदा के दौरान तेज और समन्वित प्रतिक्रिया की जरूरत को एक बार फिर सामने रखा है। ऐसे में 1,100 जवानों वाली यह प्रस्तावित फोर्स दिल्ली के आपदा प्रबंधन ढांचे को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।