‘किसी को राज्यसभा भेजने से पहले सौ बार ठोंक-बजाकर देखेंगे’- केजरीवाल का राघव चड्ढा पर हमला
आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पार्टी छोड़कर जाने वाले राज्यसभा सांसदों को लेकर तीखा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आगे से किसी भी व्यक्ति को राज्यसभा भेजने से पहले उसकी निष्ठा और भरोसेमंद होने की अच्छी तरह जांच की जाएगी। केजरीवाल ने कहा कि अब पार्टी किसी को राज्यसभा भेजने से पहले “सौ बार ठोंक-बजाकर” देखेगी।
केजरीवाल ने भले ही अपने बयान में राघव चड्ढा का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन उनका बयान हाल में आम आदमी पार्टी छोड़ने वाले राज्यसभा सांसदों के संदर्भ में आया। राघव चड्ढा के पार्टी से अलग होने के बाद AAP के भीतर इस घटनाक्रम को लेकर सवाल उठे हैं।
‘पार्टी ने राज्यसभा भेजा था, जनता ने नहीं’
केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी के लिए राज्यसभा सांसदों का पार्टी छोड़कर जाना बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को पार्टी ने राज्यसभा भेजा, उन्हें जनता ने सीधे नहीं चुना था। उनके मुताबिक, पार्टी ने भरोसा करके इन लोगों को संसद के उच्च सदन में भेजा था।
उन्होंने कहा कि कुछ सांसदों के पार्टी छोड़ने की घटना से आम आदमी पार्टी ने सबक लिया है। अब भविष्य में राज्यसभा के लिए उम्मीदवार चुनते समय ज्यादा सावधानी बरती जाएगी।
पार्टी छोड़ने वालों पर साधा निशाना
केजरीवाल ने कहा कि जिन लोगों को AAP ने राज्यसभा भेजा, उनके पार्टी छोड़ने से उन्हें निराशा हुई है। उन्होंने इसे पार्टी के लिए एक सीख बताते हुए कहा कि भविष्य में उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया में व्यक्ति की निष्ठा और भरोसेमंद होने की जांच ज्यादा गंभीरता से की जाएगी।
उन्होंने कहा कि पार्टी के चुने हुए प्रतिनिधियों ने अलग-अलग राज्यों में दबाव के बावजूद पार्टी का साथ नहीं छोड़ा। इस दौरान केजरीवाल ने दिल्ली, गोवा, जम्मू-कश्मीर और गुजरात के उदाहरण भी दिए।
विधायकों के टूटने की कोशिशों का किया जिक्र
केजरीवाल ने AAP के शुरुआती राजनीतिक दौर को याद करते हुए कहा कि 2013 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 28 सीटें जीती थीं। उनके अनुसार उस समय सरकार बनाने के लिए चार विधायकों की जरूरत थी और AAP के विधायकों को तोड़ने की कोशिश की गई, लेकिन वे पार्टी के साथ रहे।
उन्होंने गोवा के दो विधायकों का भी जिक्र किया और कहा कि लंबे समय से उन्हें तोड़ने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वे पार्टी के साथ बने हुए हैं। जम्मू-कश्मीर और गुजरात के विधायकों का उदाहरण देते हुए भी उन्होंने दावा किया कि पार्टी के निर्वाचित प्रतिनिधियों ने दबाव के बावजूद साथ नहीं छोड़ा।
राघव चड्ढा के जाने के बाद बढ़ी चर्चा
राघव चड्ढा के AAP से अलग होने के बाद केजरीवाल की यह टिप्पणी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि केजरीवाल ने अपने बयान में राघव चड्ढा का नाम नहीं लिया, लेकिन मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम के कारण उनके बयान को राघव चड्ढा से जोड़कर देखा जा रहा है।
केजरीवाल ने साफ संकेत दिया कि भविष्य में राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में पार्टी पहले की तुलना में ज्यादा सतर्क रहेगी। उनके बयान से यह भी स्पष्ट है कि AAP हालिया घटनाक्रम को पार्टी के लिए एक सबक के तौर पर देख रही है।