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पांच साल से जेल में बंद कथित ISIS मॉड्यूल आरोपी को हाईकोर्ट से जमानत, धीमी सुनवाई बनी अहम वजह

 

दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित ISIS मॉड्यूल से जुड़े UAPA मामले में करीब पांच साल से जेल में बंद आरोपी मोहम्मद शहजाद कमाल को जमानत दे दी है। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस अरुण भारद्वाज की खंडपीठ ने कमाल की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए उसकी जमानत मंजूर की। आरोपी ने विशेष अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें मई 2024 में उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।

मोहम्मद शहजाद कमाल 31 अगस्त 2021 से हिरासत में है। उसके खिलाफ UAPA के तहत 30 अगस्त 2022 को आरोप तय किए गए थे। राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA का आरोप है कि कमाल कथित आतंकी संगठन हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम से जुड़ी गतिविधियों के लिए फंड जुटाने और उसे पहुंचाने की साजिश में शामिल था। एजेंसी के अनुसार, आरोपी ने फरवरी 2017 से जनवरी 2019 के बीच कई मौकों पर सह-आरोपी मोहम्मद अबसर को कथित तौर पर धन उपलब्ध कराया था।

आरोपी की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि वह लंबे समय से जेल में है और मामले की सुनवाई तेजी से आगे नहीं बढ़ रही है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपपत्र और उसके साथ दाखिल दस्तावेजों में ऐसी पर्याप्त सामग्री नहीं है, जिसे मुकदमे के दौरान कानूनी साक्ष्य में बदला जा सके। इसी आधार पर लंबे समय से चल रही हिरासत को देखते हुए जमानत की मांग की गई।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद आरोपी की अपील स्वीकार करते हुए जमानत देने का आदेश दिया। हालांकि, अदालत ने किन विशेष शर्तों के तहत जमानत दी है और विस्तृत कानूनी आधार क्या रहे, इसकी पूरी जानकारी विस्तृत आदेश जारी होने के बाद सामने आएगी। फिलहाल कोर्ट का विस्तृत आदेश प्रतीक्षित है।

गौरतलब है कि UAPA जैसे मामलों में लंबे समय तक विचाराधीन कैद और सुनवाई में देरी को लेकर अदालतें कई मामलों में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और त्वरित सुनवाई के अधिकार पर विचार कर चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी पूर्व के मामलों में कहा है कि लंबे समय तक मुकदमा आगे नहीं बढ़ने की स्थिति में जमानत के सवाल पर संवैधानिक अधिकारों को ध्यान में रखना जरूरी है।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि हाईकोर्ट से जमानत मिलने का मतलब आरोपी का आरोपों से बरी होना नहीं है। मोहम्मद शहजाद कमाल के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी न्यायिक विचाराधीन हैं और मामले में अंतिम फैसला मुकदमे की सुनवाई तथा अदालत के सामने पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर होगा।