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न्यू राजेंद्र नगर साप्ताहिक बाजार पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- आजीविका के नाम पर रास्ता रोकना स्वीकार नहीं

 

दिल्ली के न्यू राजेंद्र नगर में लगने वाले साप्ताहिक बाजार से स्थानीय लोगों को हो रही परेशानी को दिल्ली हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। अदालत ने रेहड़ी-पटरी दुकानदारों की गतिविधियों पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि रोजगार कमाने का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी आड़ में सार्वजनिक रास्तों को बाधित करना और लोगों की आवाजाही में परेशानी पैदा करना उचित नहीं है।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि सड़कों, फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल इस तरह नहीं किया जा सकता, जिससे आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़े। अदालत ने स्पष्ट किया कि आजीविका कमाने का अधिकार किसी अन्य व्यक्ति के आवागमन के अधिकार को प्रभावित नहीं कर सकता।

न्यू राजेंद्र नगर के स्थानीय निवासियों की ओर से साप्ताहिक बाजार के कारण होने वाली समस्याओं को लेकर शिकायत की गई थी। लोगों का कहना था कि बाजार लगने से सड़क पर भीड़ बढ़ जाती है, रास्ते प्रभावित होते हैं और स्थानीय निवासियों को आने-जाने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा यातायात व्यवस्था और साफ-सफाई से जुड़ी समस्याएं भी सामने आती हैं।

हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए रेहड़ी-पटरी दुकानदारों के लिए कुछ पाबंदियां तय करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि बाजार लगाने की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे दुकानदारों की आजीविका भी प्रभावित न हो और स्थानीय लोगों को भी असुविधा न हो।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण या इस तरह कब्जा करना जिससे लोगों का रास्ता बंद हो जाए, स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि साप्ताहिक बाजार निर्धारित नियमों और स्थानों के अनुसार ही संचालित हों।

अदालत के निर्देश के बाद अब स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। उन्हें बाजार संचालन की व्यवस्था, दुकानों के स्थान निर्धारण और आम लोगों की सुविधाओं के बीच संतुलन बनाना होगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि साप्ताहिक बाजार से उन्हें कई बार जाम, शोर और असुविधा का सामना करना पड़ता है। वहीं, रेहड़ी-पटरी दुकानदारों का तर्क है कि यह उनकी आजीविका का साधन है और उन्हें भी व्यापार करने का अधिकार मिलना चाहिए।

हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया है। अदालत का कहना है कि किसी भी व्यक्ति का रोजगार का अधिकार दूसरे लोगों के मूलभूत अधिकारों में बाधा नहीं बनना चाहिए।

अब प्रशासन को हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार बाजार व्यवस्था में बदलाव करना होगा। आने वाले समय में यह तय किया जाएगा कि न्यू राजेंद्र नगर का साप्ताहिक बाजार किस तरह संचालित होगा, जिससे दुकानदारों और स्थानीय निवासियों दोनों को राहत मिल सके।