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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ED की दलील, याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर उठाए सवाल

 

सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता Zoheb Hossain ने याचिका की मेंटेनेबिलिटी (सुनवाई योग्य होने) को लेकर शुरुआती आपत्ति दर्ज कराई। यह मामला Enforcement Directorate से जुड़ी कानूनी कार्यवाही के संदर्भ में सामने आया, जहां अदालत में विभिन्न संवैधानिक और वैधानिक प्रावधानों की व्याख्या पर बहस हुई।

सुनवाई के दौरान ED की ओर से यह तर्क दिया गया कि जिस प्रावधान को चुनौती दी जा रही है, उसकी वैधता पहले ही सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्पष्ट रूप से बरकरार रखी जा चुकी है। इस संदर्भ में विशेष रूप से Section 5 of PMLA का उल्लेख किया गया, जिसे लेकर याचिकाकर्ता पक्ष की दलीलों को चुनौती दी गई।

ED के वकील ने अदालत के सामने यह बात रखी कि Vijay Madanlal Choudhary judgment मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि संबंधित कानून और उसके प्रावधान संवैधानिक रूप से वैध हैं। ऐसे में उसी मुद्दे को दोबारा चुनौती देने वाली याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठता है।

एजेंसी की ओर से यह भी कहा गया कि जब किसी कानून की संवैधानिक वैधता पर पहले ही अंतिम निर्णय आ चुका हो, तो उसी आधार पर दोबारा सुनवाई की मांग करना न्यायिक प्रक्रिया के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। इसी कारण से याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर प्रारंभिक आपत्ति दर्ज कराई गई।

सूत्रों के अनुसार, अदालत में इस दौरान कानून की व्याख्या, पूर्व निर्णयों की बाध्यता और पुनर्विचार याचिकाओं की सीमा जैसे कानूनी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

इस दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने अपने तर्कों में कहा कि संबंधित प्रावधानों की व्याख्या और उनके व्यावहारिक अनुप्रयोग को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं, जिन्हें स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता है। हालांकि ED की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि यह मुद्दा पहले ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले में निर्णीत हो चुका है।

यह मामला कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें एक ओर प्रवर्तन एजेंसियों की शक्तियों का प्रश्न है, तो दूसरी ओर संवैधानिक अधिकारों और न्यायिक समीक्षा की सीमाओं पर बहस जारी है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी है और दोनों पक्षों को विस्तृत लिखित दलीलें दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।