दिल्ली के 64 गोलमटोल कुत्तों का अनोखा चुनाव, दिवंगत गोला ने 66,952 वोटों से जीता खिताब
दिल्ली में इन दिनों एक ऐसा अनोखा चुनाव चर्चा में रहा, जिसमें नेता नहीं बल्कि शहर के गोलमटोल स्ट्रीट डॉग्स उम्मीदवार बने। करीब 64 कुत्तों के बीच हुए इस मजेदार मुकाबले में हौज खास के SDA मार्केट की दिवंगत फीमेल डॉग गोला ने बाजी मारी। गोला को फाइनल मुकाबले में 66,952 वोट मिले और उसने साकेत की गूगू को 39,904 वोटों के अंतर से पीछे छोड़ दिया।
गोला की मौत के बाद भी जारी रहा मुकाबला
गोला को केबाब और राजपाल सिंह के नाम से भी जाना जाता था। वह हौज खास के SDA मार्केट में रहने वाली एक चर्चित कम्युनिटी डॉग थी। प्रतियोगिता के दौरान ही उसकी मौत हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद उसका नाम वोटिंग से नहीं हटाया गया।
गोला के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर लगातार उसके लिए कैंपेन चलाया। पोस्टर, मीम्स और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए लोगों से वोट करने की अपील की गई। आखिरकार फाइनल में गोला ने बड़ी बढ़त के साथ खिताब अपने नाम कर लिया।
करीब 94 हजार वोट पड़े
‘Fat Dogs of Delhi’ नाम से शुरू हुए इस अनोखे मुकाबले में दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से 64 कुत्तों को शामिल किया गया था। प्रतियोगिता आगे बढ़ते-बढ़ते फाइनल में गोला और साकेत की गूगू आमने-सामने रह गईं।
फाइनल में करीब 94 हजार वोट पड़े। हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक 92,598 ऑनलाइन और 1,042 ऑफलाइन वोट दर्ज किए गए। गोला को 66,954 और गूगू को 27,046 वोट मिले। कुछ रिपोर्टों में गोला के वोटों की संख्या 66,952 बताई गई है, इसलिए कुल आंकड़ों में मामूली अंतर सामने आया है।
दिल्ली के कई इलाकों में बने पोलिंग बूथ
यह मुकाबला सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा। आयोजकों ने दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में ऑफलाइन वोटिंग की भी व्यवस्था की। वसंत विहार, कमला नगर और पंजाबी बाग समेत कई जगहों पर पोलिंग बूथ बनाए गए, जहां लोगों ने अपने पसंदीदा डॉग के लिए वोट किया।
इस प्रतियोगिता ने सोशल मीडिया पर भी खूब ध्यान खींचा। अलग-अलग इलाकों के लोगों ने अपने पसंदीदा कुत्तों के लिए कैंपेन चलाए और उनके नाम से पोस्टर तथा सोशल मीडिया पेज बनाए।
प्रतियोगिता के साथ जुड़ा पशु कल्याण अभियान
आयोजकों के मुताबिक इस प्रतियोगिता से जुटे ध्यान और सहयोग का इस्तेमाल कम्युनिटी डॉग्स के लिए भी किया जा रहा है। प्रतियोगिता के बाद कुत्तों के लिए भोजन, बेड, कॉलर और मेडिकल मदद जैसी चीजों की व्यवस्था से जुड़े सहयोग की बात सामने आई है।
इस तरह दिल्ली का यह अनोखा ‘डॉग चुनाव’ सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके जरिए शहर के कम्युनिटी डॉग्स और उनके कल्याण को लेकर भी लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ।