Delhi में 300 एकड़ पर 26 झीलें, 230 एमजीडी ट्रीटेड पानी डाला जाएगा
सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हम लोग जानते हैं कि दिल्ली में पीने के पानी की किल्लत है। एक तरफ दिल्ली सरकार कि कोशिश है कि दिल्ली को पड़ोसी राज्यों से पीने का पानी मिल सके। इसके लिए बातचीत जारी है। मगर दूसरी तरफ दिल्ली सरकार आत्मनिर्भर बन अपने स्तर पर भूजल को रिचार्ज और रिसाइकल कर रही है। दिल्ली की जनता को पानी उपलब्ध कराने की दिशा में हर संभव काम कर रही है। आज 21वीं सदी में ऐसी बहुत सी तकनीक आई हैं, जिसकी मदद से ग्राउंड वाटर को रिचार्ज और रिसाइकल कर इस्तेमाल किया जा सकता है। देशभर में ऐसे कई प्रयोग भी हुए हैं। इसी दिशा में दिल्ली सरकार राजधानी के अंदर यह प्रयास कर रही है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के पानी को 10 में से 10 शुद्धता तक साफ करके इसे झीलों में डाला जा रहा है। पप्पन कलां झील में इसी आधार पर 7 और 4 एकड़ के दो कृत्रिम झीलें बनाई गई हैं। इन झीलों के अंदर एसटीपी का ट्रीटेड पानी छोड़ा जाता है। इस तरह यहां झील बनने से दो फायदे हुए हैं। पहला, यहां झील बनने से इस क्षेत्र की खूबसूरती बढ़ गई है। दिल्ली सरकार यहां लैंडस्कैपिंग का काम करेगी और पार्क बनवाएगी। जिसमें लोग आकर आनंद ले सकेंगे।
सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कृत्रिम झील का दूसरा फायदा यह है कि झील के अंदर एक साल से ट्रीटेड पानी डालने से इसके आसपास के आधे किलोमीटर के क्षेत्र में भूजल का स्तर बढ़ा है। भूजल स्तर 6.25 मीटर बढ़ गया है। जबकि पहले क्षेत्र का भूजल स्तर 20 मीटर नीचे चला गया था। जल बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक अब इस क्षेत्र में आधे किलोमीटर दूर तक जमीन को 13 मीटर खोदने पर ही पानी उपलब्ध है। सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि झील के आस-पास के क्षेत्र में पीजोमीटर लगाए जा रहे हैं, जो यह बताएंगे कि भूजल का स्तर कितना बढ़ा है। थोड़े दिन बाद आसपास के क्षेत्र में ट्यूबवेल और आरओ मशीन लगाई जाएंगी। ट्यूबवेल से भूजल निकाल कर उसे आरओ से ट्रीट किया जाएगा। जिसे एसटीपी प्लांट से थोड़ी दूर स्थित यूजीआर में इकट्ठा किया जाएगा। इसी पानी को पीने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
--आईएएनएस
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