दिल्ली सत्य निकेतन हादसा: 5 मौतों के बाद एक्शन में MCD, 10 सितंबर तक इमारतों की जांच के आदेश
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने से हुई 5 लोगों की मौत के बाद अब दिल्ली सरकार, उपराज्यपाल और संबंधित एजेंसियां एक्शन मोड में आ गई हैं। हादसे के बाद राजधानी में जर्जर और खतरनाक इमारतों को लेकर प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। इसी को देखते हुए एमसीडी ने सभी एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों को अपने-अपने क्षेत्रों में इमारतों की जांच करने और 10 सितंबर तक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य ऐसी इमारतों की पहचान करना है, जिनकी स्थिति कमजोर है और जिनसे लोगों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। अधिकारियों को जांच के दौरान इमारतों की स्थिति का जायजा लेकर रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद बढ़ी चिंता
सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना ने एक बार फिर राजधानी में पुरानी और कमजोर इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में पांच लोगों की जान चली गई। घटना के बाद प्रशासन और स्थानीय निकायों पर ऐसी इमारतों की पहचान और समय रहते कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया है।
हादसे के बाद अब एमसीडी ने अपने इंजीनियरिंग अधिकारियों को सक्रिय करते हुए इमारतों का निरीक्षण शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
10 सितंबर तक देनी होगी रिपोर्ट
एमसीडी की ओर से एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों को स्पष्ट समयसीमा दी गई है। उन्हें अपने क्षेत्रों में इमारतों की जांच कर 10 सितंबर तक रिपोर्ट सौंपनी होगी।जांच के दौरान यह पता लगाने पर जोर रहेगा कि कहीं कोई इमारत ऐसी स्थिति में तो नहीं है, जिससे उसके आसपास रहने वाले लोगों या राहगीरों की जान को खतरा हो। अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई किए जाने की उम्मीद है।
एलजी और सरकार भी एक्शन मोड में
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली के उपराज्यपाल, सरकार और संबंधित एजेंसियों की सक्रियता बढ़ गई है। राजधानी में इमारतों की सुरक्षा और संभावित हादसों को रोकने के लिए संबंधित विभागों के स्तर पर कार्रवाई की जा रही है।ऐसे में एमसीडी की ओर से शुरू की गई यह जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि निरीक्षण के दौरान किसी इमारत की हालत खतरनाक पाई जाती है तो संबंधित एजेंसियां उसकी स्थिति के आधार पर आवश्यक कदम उठा सकती हैं।
जर्जर इमारतों की पहचान पर जोर
दिल्ली में बड़ी संख्या में पुरानी और वर्षों से इस्तेमाल हो रही इमारतें मौजूद हैं। इनमें से कुछ इमारतों की संरचनात्मक स्थिति समय के साथ कमजोर हो सकती है। ऐसे में नियमित निरीक्षण और समय पर मरम्मत या अन्य जरूरी कार्रवाई हादसों को रोकने में अहम भूमिका निभाती है।सत्य निकेतन की घटना के बाद अब एमसीडी का यह अभियान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 10 सितंबर तक आने वाली जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में कितनी इमारतों की स्थिति चिंता का विषय है और आगे किन मामलों में कार्रवाई की जरूरत पड़ सकती है।