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अलका लांबा की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, प्राथमिकी रद्द करने के मामले में दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब

 

दिल्ली हाई कोर्ट ने वर्ष 2024 में महिला आरक्षण के समर्थन में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ी प्राथमिकी (एफआईआर) को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस से जवाब तलब किया है। यह याचिका कांग्रेस नेता अलका लांबा की ओर से दायर की गई है।

अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को नोटिस जारी कर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह पुलिस के जवाब के बाद ही मामले में आगे की सुनवाई करेगी और तथ्यों के आधार पर निर्णय लेगी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि महिला आरक्षण के समर्थन में किया गया प्रदर्शन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत था। ऐसे में प्रदर्शन से संबंधित प्राथमिकी दर्ज करना अनुचित और मौलिक अधिकारों का हनन है। याचिका में यह भी कहा गया कि विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य संसद में महिला आरक्षण विधेयक के समर्थन में आवाज उठाना था, न कि कानून-व्यवस्था भंग करना।

दूसरी ओर, अदालत ने कहा कि किसी भी प्राथमिकी को रद्द करने से पहले सभी तथ्यों और परिस्थितियों की विस्तार से समीक्षा आवश्यक है। न्यायालय ने पुलिस से यह स्पष्ट करने को कहा है कि किन परिस्थितियों में मामला दर्ज किया गया और क्या प्रदर्शन के दौरान किसी प्रकार की कानून व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हुई थी।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हलफनामे में घटना का पूरा विवरण, सबूतों की स्थिति और जांच की वर्तमान प्रगति का उल्लेख किया जाए। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता है, तो उचित आदेश पारित किया जाएगा।

गौरतलब है कि वर्ष 2024 में महिला आरक्षण को लेकर राजधानी में विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शन किए थे। इसी क्रम में दर्ज एक प्राथमिकी को लेकर यह कानूनी विवाद सामने आया है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार से जुड़ा है। वहीं, प्रशासन का पक्ष है कि किसी भी सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होती है।