दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से जूझ रहे 3 वर्षीय बच्चे के इलाज पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा जवाब
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित तीन वर्षीय बच्चे के इलाज के लिए वित्तीय सहायता की मांग संबंधी याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा कि बच्चे के उपचार के लिए क्या सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है।
यह मामला एक ऐसे मासूम से जुड़ा है, जो गंभीर और दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित है। याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया है कि बच्चे के महंगे इलाज के लिए सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाए, क्योंकि उपचार का खर्च परिवार की आर्थिक क्षमता से बाहर है।
हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा पक्ष
सुनवाई के दौरान Delhi High Court ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि ऐसे मामलों में सहायता प्रदान करने की क्या व्यवस्था है।
महंगा है दुर्लभ बीमारियों का इलाज
विशेषज्ञों के अनुसार, दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों के उपचार में अक्सर अत्यधिक खर्च आता है। कई बार दवाएं और चिकित्सा प्रक्रियाएं विदेशों से मंगानी पड़ती हैं, जिससे इलाज की लागत करोड़ों रुपये तक पहुंच सकती है।
इसी कारण अनेक परिवार आर्थिक संकट का सामना करते हैं और सरकारी सहायता की मांग करते हैं।
बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर चिंता
याचिका में कहा गया है कि बच्चे को समय पर उपचार मिलना बेहद जरूरी है। इलाज में देरी होने पर उसकी स्वास्थ्य स्थिति और गंभीर हो सकती है। इस आधार पर अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है।
दुर्लभ रोगों पर पहले भी हुई है सुनवाई
देश की विभिन्न अदालतें पहले भी दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों के इलाज और वित्तीय सहायता से जुड़े मामलों पर सुनवाई कर चुकी हैं। कई मामलों में केंद्र और राज्य सरकारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें
अब सभी की नजर मामले की अगली सुनवाई पर है, जहां केंद्र सरकार अपना पक्ष अदालत के समक्ष रखेगी। अदालत के निर्देश और सरकार के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
यह मामला एक बार फिर दुर्लभ बीमारियों के इलाज, उनकी ऊंची लागत और मरीजों के लिए सरकारी सहायता की आवश्यकता को केंद्र में ले आया है।