एम्स दिल्ली में कीमोथेरेपी सेवा बंद होने पर विवाद, डॉक्टरों ने जताई आपत्ति
राष्ट्रीय राजधानी के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग में लंबे समय से चल रही कीमोथेरेपी सेवा को बंद किए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। यह सेवा करीब 50 वर्षों से मरीजों को दी जा रही थी।
डॉक्टरों और संबंधित मेडिकल एसोसिएशन ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इस तरह की सुविधा को अचानक बंद करना मरीजों के इलाज और कैंसर देखभाल व्यवस्था पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने इसे “एकतरफा और मनमाना फैसला” बताते हुए कहा है कि इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया जाएगा। डॉक्टरों का कहना है कि वे इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात कर हस्तक्षेप की मांग करेंगे।
वहीं, इस फैसले के बाद मरीजों और उनके परिजनों में भी चिंता बढ़ गई है, क्योंकि एम्स देश के प्रमुख इलाज केंद्रों में से एक माना जाता है और यहां देशभर से गंभीर मरीज उपचार के लिए आते हैं।
मेडिकल विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सेवाओं में बदलाव करते समय वैकल्पिक व्यवस्था और संक्रमण योजना (transition plan) जरूरी होती है, ताकि मरीजों की चिकित्सा प्रभावित न हो।
फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस निर्णय के पीछे के कारणों को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। मामला सामने आने के बाद इस पर चर्चा तेज हो गई है और स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
कुल मिलाकर, यह विवाद एम्स जैसी प्रमुख स्वास्थ्य संस्था में चिकित्सा सेवाओं के प्रबंधन और निर्णय प्रक्रिया पर गंभीर बहस को जन्म दे रहा है।