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कांग्रेस ने जारी की ‘रियल स्टेट ऑफ द इकोनॉमी 2026’ रिपोर्ट, केंद्र की नीतियों पर कसा शिकंजा

 

कांग्रेस ने मंगलवार को ‘रियल स्टेट ऑफ द इकोनॉमी 2026’ नामक रिपोर्ट जारी कर केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। इस रिपोर्ट में सरकार द्वारा किए जा रहे भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत दिखाने वाले दावों पर सवाल उठाए गए हैं और कई आंकड़ों के जरिए असंतुलित विकास और आर्थिक असमानता की ओर ध्यान दिलाया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में आर्थिक असमानता तेजी से बढ़ रही है। इसके अलावा, सरकार की कल्याणकारी योजनाओं में कटौती ने गरीब और मध्यम वर्ग के लिए सामाजिक सुरक्षा तंत्र को कमजोर किया है। कांग्रेस के पूर्व सांसद प्रो. राजीव गौड़ा ने कहा कि यह रिपोर्ट सरकार के दावों और वास्तविक परिस्थितियों के बीच अंतर को उजागर करती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों से गरीब और वंचित वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है। प्रो. राजीव गौड़ा ने कहा, “जब देश में रोजगार के अवसर सीमित हो रहे हैं और महंगाई बढ़ रही है, तब कल्याणकारी योजनाओं में कटौती करना सामाजिक असमानता को बढ़ावा देता है। इससे देश का विकास केवल कुछ खास वर्गों तक सीमित रह जाता है।”

रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि केंद्र सरकार ने समान रूप से आर्थिक नीतियों को लागू नहीं किया, तो इससे गरीब, किसान और छोटे कारोबारियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसमें सुझाव दिया गया है कि सरकार को सकारात्मक और समावेशी नीतियों को अपनाना चाहिए ताकि आर्थिक विकास सभी वर्गों तक पहुंचे।

विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस द्वारा जारी यह रिपोर्ट राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के आंकड़े और विश्लेषण सरकार की आर्थिक नीतियों के प्रभाव को सटीक रूप में दर्शाते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आने वाले महीनों में यह रिपोर्ट सियासी बहस और नीति निर्धारण दोनों में अहम भूमिका निभा सकती है।

रिपोर्ट के माध्यम से कांग्रेस ने केंद्र सरकार को आलोचना और सुझाव दोनों दिए हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा और रोजगार सृजन योजनाओं में निवेश बढ़ाकर ही असमानता को कम किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने सरकार से यह भी कहा कि गरीब और मध्यम वर्ग के कल्याण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

कुल मिलाकर, ‘रियल स्टेट ऑफ द इकोनॉमी 2026’ रिपोर्ट ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल खड़ा किया है और आगामी समय में राजनीतिक बहस और आर्थिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की संभावना जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि भारत की अर्थव्यवस्था में असमानता और कल्याणकारी योजनाओं की कटौती गंभीर मुद्दे बन चुके हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।