सत्य निकेतन में 7 मंजिला इमारत गिरने से मचा हड़कंप, कमजोर नींव और अतिरिक्त मंजिलें बनीं हादसे की वजह?
राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 7 मंजिला इमारत गिरने की घटना ने पीजी में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती तौर पर इमारत गिरने के पीछे कई संभावित कारण सामने आ रहे हैं। इनमें कमजोर नींव, बीम की कमी, बेसमेंट में पानी भरना और बिना पर्याप्त मजबूती के अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण प्रमुख वजहें मानी जा रही हैं।
बताया जा रहा है कि इमारत में बड़ी संख्या में छात्र पीजी के तौर पर रह रहे थे। ऐसे में अचानक इमारत के भरभराकर गिरने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हादसे के बाद राहत और बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया।
कमजोर नींव ने बढ़ाया खतरा
जानकारी के मुताबिक, इमारत की नींव इतनी मजबूत नहीं थी कि वह कई मंजिलों का भार आसानी से उठा सके। समय के साथ इमारत पर अतिरिक्त भार बढ़ता गया, जिससे उसके ढांचे पर दबाव बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नींव की कमजोरी हादसे में कितनी बड़ी वजह रही।
बीम की कमी भी बनी चिंता
इमारत के ढांचे में पर्याप्त बीम और जरूरी सपोर्ट की कमी को भी हादसे की संभावित वजह माना जा रहा है। बहुमंजिला इमारतों में बीम और कॉलम पूरे ढांचे का भार संभालते हैं। इनमें किसी तरह की कमी या निर्माण के दौरान मानकों की अनदेखी इमारत की मजबूती को प्रभावित कर सकती है।
बेसमेंट में पानी भरने से ढांचे पर असर
इमारत के बेसमेंट में पानी जमा होने की बात भी सामने आई है। लगातार पानी भरने से नींव और निचले हिस्से के निर्माण पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, पानी की वजह से ढांचे को कितना नुकसान पहुंचा और क्या यह इमारत गिरने का प्रमुख कारण था, इसकी पुष्टि विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही होगी।
बिना मजबूती के बनाई गईं अतिरिक्त मंजिलें
इमारत में बिना पर्याप्त संरचनात्मक मजबूती के अतिरिक्त मंजिलें बनाए जाने की बात भी सामने आ रही है। अगर किसी इमारत को उसकी मूल डिजाइन और स्वीकृत क्षमता से अधिक भार दिया जाता है तो इससे ढांचे पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। सत्य निकेतन की घटना के बाद अब इस पहलू की भी जांच की जा रही है।
पीजी इमारतों की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस हादसे ने दिल्ली में पीजी के तौर पर इस्तेमाल हो रही बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बड़ी संख्या में छात्र ऐसी इमारतों में रहते हैं, लेकिन कई बार भवन की संरचनात्मक मजबूती, फायर सेफ्टी और आपातकालीन निकासी जैसे मानकों की पर्याप्त जांच नहीं हो पाती।
अब जरूरत इस बात की है कि पीजी के तौर पर इस्तेमाल हो रही पुरानी और बहुमंजिला इमारतों की नियमित जांच की जाए। सत्य निकेतन हादसे की तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही इमारत गिरने की वास्तविक वजह और जिम्मेदार लोगों की भूमिका पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।