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NEET पेपर लीक के विरोध में CJP का पहला बड़ा प्रदर्शन, भीड़ जुटी लेकिन व्यवस्थाओं की खुली पोल

 

नीट (NEET) पेपर लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्र युवा संघर्ष समिति (CJP) ने दिल्ली के जंतर मंतर पर अपना पहला बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया। प्रदर्शन में छात्रों और युवाओं की अच्छी-खासी भागीदारी देखने को मिली, जिसे संगठन की शुरुआती सफलता माना जा रहा है। हालांकि आयोजन के दौरान कई व्यवस्थागत कमियां भी सामने आईं।

भीड़ जुटाने में मिली सफलता

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे पर लोगों ने सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों ने निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।

आयोजकों का दावा है कि यह आंदोलन छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर शुरू किया गया है।

अव्यवस्थाओं ने खींचा ध्यान

हालांकि प्रदर्शन में लोगों की अच्छी मौजूदगी रही, लेकिन आयोजन के दौरान कई कमियां भी उजागर हुईं। कार्यक्रम की योजना में बार-बार बदलाव होने से प्रतिभागियों को असुविधा का सामना करना पड़ा। इसके अलावा साउंड सिस्टम अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा, जिससे कई बार मंच से दिए गए संबोधन स्पष्ट रूप से सुनाई नहीं दिए।

वॉलंटियर और संसाधनों की कमी

प्रदर्शन स्थल पर स्वयंसेवकों की संख्या कम होने के कारण भीड़ प्रबंधन में दिक्कतें सामने आईं। कई प्रतिभागियों ने बताया कि उन्हें आवश्यक जानकारी समय पर नहीं मिल सकी। इसके अलावा भीषण गर्मी के बीच पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

अनुमति और समन्वय से जुड़ी चुनौतियां

आयोजन के दौरान अनुमति और प्रशासनिक समन्वय से जुड़ी कुछ उलझनों की भी चर्चा रही। इससे कार्यक्रम के संचालन और व्यवस्थाओं पर असर पड़ा। हालांकि आयोजकों ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद आंदोलन को सफल बनाने का प्रयास किया गया।

आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी

प्रदर्शन के बाद CJP ने संकेत दिए हैं कि नीट पेपर लीक मामले को लेकर आगे भी आंदोलन जारी रहेगा। संगठन का कहना है कि छात्रों के हितों और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर उनकी लड़ाई जारी रहेगी।

राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में इस प्रदर्शन को छात्र आंदोलनों की नई कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि भीड़ जुटाने में सफलता के बावजूद व्यवस्थागत खामियों ने यह भी दिखा दिया कि बड़े स्तर के आंदोलनों के लिए बेहतर तैयारी और संसाधनों की जरूरत होगी।