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आज सुप्रीम कोर्ट में UGC नियमों को चुनौती! PIL पर होगी अहम सुनवाई, CJI खुद सुनेंगे दलीले 

 

सुप्रीम कोर्ट आज यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए 'भेदभाव विरोधी नियमों' को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करेगा। यह मामला चीफ जस्टिस जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने लिस्टेड है। बुधवार को जब याचिका का ज़िक्र किया गया, तो कोर्ट ने अर्जेंट सुनवाई के लिए सहमति दे दी। याचिकाकर्ता का तर्क है कि UGC के नए नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं। कोर्ट के सामने यह बताया गया कि इन नियमों के खिलाफ पूरे देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहा है। बेंच ने स्थिति को समझा और निर्देश दिया कि याचिका में तकनीकी खामियों को ठीक किया जाए।

UGC के नए नियम क्या कहते हैं?

UGC के नए नियमों के तहत, सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में इक्विटी कमेटियों का गठन अनिवार्य है। ये कमेटियां भेदभाव की शिकायतों की जांच करने और समानता को बढ़ावा देने के लिए ज़िम्मेदार होंगी। नियमों के अनुसार, इन कमेटियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों के प्रतिनिधि शामिल होने चाहिए।

नए नियमों के दुरुपयोग की आशंका

ये नए नियम 2012 के पुराने नियमों की जगह लेंगे, जो सलाहकारी प्रकृति के थे। आलोचकों का कहना है कि नए नियमों में प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता की कमी है और इनका दुरुपयोग हो सकता है। यह भी आरोप लगाया गया है कि नए फ्रेमवर्क में OBC समुदायों के सदस्यों को संभावित पीड़ितों के रूप में शामिल किया गया है, लेकिन सामान्य वर्ग के छात्रों को बाहर रखा गया है। उनका दावा है कि सामान्य वर्ग को बाहर रखने का मतलब है कि उन्हें जाति-आधारित भेदभाव के अपराधियों के रूप में स्थायी रूप से लेबल किया जा रहा है।

कई राज्यों में छात्रों का विरोध प्रदर्शन

दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार सहित कई राज्यों में छात्रों ने नए नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है। इस बीच, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आश्वासन दिया है कि नए नियमों के तहत किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा और इनका दुरुपयोग नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह सरकार और संबंधित संस्थानों की ज़िम्मेदारी होगी कि कानून का दुरुपयोग न हो।