दिल्ली-एनसीआर में उद्योगों पर सख्ती, सीएक्यूएम ने पार्टिकुलेट मैटर उत्सर्जन सीमा 50 मिलीग्राम तय की
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली-एनसीआर में औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। आयोग ने औद्योगिक इकाइयों के लिए पार्टिकुलेट मैटर (PM) उत्सर्जन की अधिकतम सीमा 50 मिलीग्राम प्रति नॉर्मल क्यूबिक मीटर तय करने का प्रस्ताव पेश किया है।
सूत्रों के अनुसार, इस नए मानक को इस साल अगस्त तक लागू करने की योजना है। यह नियम केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की ओर से चिन्हित 17 अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर पहले लागू होगा।
नया मानक तय करने में आईटीआइ कानपुर और CPCB की तकनीकी समिति की सिफारिशों को आधार बनाया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले हानिकारक PM कणों की मात्रा कम होगी और वायु गुणवत्ता में सुधार आएगा।
सीएक्यूएम ने इस प्रस्ताव के तहत उद्योगों को उत्सर्जन घटाने के लिए नवीनतम तकनीक अपनाने और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। यदि उद्योग निर्धारित सीमा का उल्लंघन करते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों और वाहनों के कारण वायु प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इस नए मानक के लागू होने से न केवल स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव कम होंगे, बल्कि क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में सुधार भी संभव होगा।
केंद्र और राज्य सरकारों ने मिलकर इस दिशा में कदम बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है। आयोग का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए उद्योगों की सहभागिता बेहद महत्वपूर्ण है और नियमों का पालन न करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।