PMLA के तहत साइबर अपराध पर बड़ा खुलासा: 257 मामलों में ₹35,925 करोड़ की अवैध कमाई का पता
देश में धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) के तहत साइबर अपराध से जुड़े मामलों में बड़े पैमाने पर अवैध धन के लेन-देन का खुलासा हुआ है। केंद्र सरकार के अनुसार, अब तक ऐसे लगभग 257 मामले सामने आए हैं, जिनमें मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए हजारों करोड़ रुपये की आपराधिक आय अर्जित की गई है।
लोकसभा में मंगलवार को गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 28 फरवरी तक साइबर अपराध से जुड़े इन मामलों की जांच के दौरान कुल ₹35,925.58 करोड़ की अपराध से अर्जित संपत्ति का पता लगाया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन मामलों में डिजिटल माध्यमों से ठगी, ऑनलाइन धोखाधड़ी, निवेश घोटाले और अन्य साइबर अपराध शामिल हैं, जिनके जरिए अवैध धन का प्रवाह किया गया।
Enforcement Directorate (ED) का कहना है कि इन मामलों में न केवल वित्तीय अनियमितताओं की जांच की जा रही है, बल्कि अपराध से जुड़ी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया भी जारी है।
सरकार ने बताया कि इस कार्रवाई के तहत हजारों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है और कई मामलों में जांच अभी भी जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन लेन-देन के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों में भी तेजी आई है, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों की चुनौती और गंभीर हो गई है।
सरकार का कहना है कि साइबर अपराधों पर नियंत्रण और वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जांच एजेंसियों को और अधिक सशक्त बनाया जा रहा है, ताकि ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।