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दिल्ली में प्रदूषण से राहत के लिए दिवाली-छठ के बाद होगी कृत्रिम बारिश! AQI 367 पहुंचा, सरकार ने किए दो ट्रायल

 

दिल्ली में वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 'बेहद खराब' श्रेणी में पहुंच गया है। ऐसे में प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार कृत्रिम बारिश कराने की तैयारी कर रही है। इसके लिए पिछले 15 दिनों में क्लाउड सीडिंग के दो परीक्षण भी किए जा चुके हैं। सरकार दिवाली और छठ के बाद कृत्रिम बारिश कराने की संभावनाओं पर विचार कर रही है।

5 नवंबर 2026 को सुबह करीब 10 बजे दिल्ली का औसत AQI 367 दर्ज किया गया। वहीं, राजधानी के कुछ इलाकों में प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी तक पहुंच गया। जहांगीरपुरी में AQI 459 रिकॉर्ड किया गया, जबकि IIT दिल्ली और पंजाबी बाग में यह 445 रहा। लगातार बढ़ते प्रदूषण के बीच सरकार वैकल्पिक उपायों पर काम कर रही है।

दिल्ली एयरपोर्ट के आसपास हुए दो ट्रायल

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में पिछले दो सप्ताह के दौरान क्लाउड सीडिंग के दो परीक्षण किए गए। ये परीक्षण इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास किए गए। इस बार प्रयोग करीब 30 हजार मीटर की ऊंचाई पर किए जाने की जानकारी सामने आई है। पिछले साल दिल्ली में क्लाउड सीडिंग का प्रयोग लगभग 10 हजार मीटर की ऊंचाई पर किया गया था।

सूत्रों के अनुसार, दिवाली और छठ के बाद दो से तीन तारीखों पर कृत्रिम बारिश कराने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, अभी इसकी तारीखों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

क्या होती है क्लाउड सीडिंग?

क्लाउड सीडिंग को कृत्रिम बारिश कराने की तकनीक कहा जाता है। इसमें सिल्वर आयोडाइड, सोडियम क्लोराइड जैसे विशेष कणों को अनुकूल बादलों में छोड़ा जाता है। इन कणों की मदद से बादलों में पानी की बूंदें या बर्फ के क्रिस्टल बनने की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलता है। अनुकूल मौसम और पर्याप्त नमी होने पर इससे बारिश होने की संभावना बढ़ सकती है।

बारिश होने पर हवा में मौजूद धूल और प्रदूषण के कुछ कण नीचे जमीन पर आ सकते हैं, जिससे कुछ समय के लिए वायु गुणवत्ता में सुधार संभव है। हालांकि, यह तकनीक हर बार सफल हो, इसकी गारंटी नहीं है। इसके लिए बादलों में पर्याप्त नमी और अनुकूल मौसमी परिस्थितियां जरूरी हैं।

पिछले साल भी हुआ था प्रयोग

दिल्ली सरकार ने पिछले साल भी IIT कानपुर के सहयोग से कृत्रिम बारिश कराने का प्रयोग किया था। हालांकि, उस दौरान पर्याप्त नमी नहीं होने के कारण बारिश नहीं हो सकी थी। इस बार किए गए परीक्षणों के बाद सरकार आगे की संभावनाओं का आकलन कर रही है।

फिलहाल दिल्ली में प्रदूषण से राहत के लिए क्लाउड सीडिंग को एक अस्थायी उपाय के रूप में देखा जा रहा है। इसका असर मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। वहीं, प्रदूषण पर स्थायी नियंत्रण के लिए वाहनों, निर्माण कार्यों, उद्योगों और अन्य स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना भी जरूरी होगा।