स्वास्थ्य विभाग में खरीद घोटाले के आरोप, सतर्कता निदेशालय ने शुरू की जांच
सतर्कता निदेशालय को भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले में शिकायत प्राप्त हुई है, जिसमें स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी पर दवाओं, सर्जिकल सामान, सर्जिकल कंज्यूमेबल्स और अन्य मेडिकल उपकरणों की खरीद में बड़े पैमाने पर कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है।
शिकायत में दावा किया गया है कि सरकारी खरीद प्रक्रिया के दौरान नियमों की अनदेखी करते हुए चयनित कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया, जिससे राज्य की स्वास्थ्य आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
मेडिकल खरीद में गड़बड़ी के आरोप
आरोपों के अनुसार, दवाओं और मेडिकल उपकरणों की खरीद में पारदर्शिता नहीं बरती गई और टेंडर प्रक्रिया में भी कथित अनियमितताएं सामने आई हैं। इसमें कुछ विशेष फर्मों को अनुचित लाभ पहुंचाने की बात कही गई है।
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, शिकायत में यह भी कहा गया है कि कई मामलों में बाजार दर से अधिक कीमत पर खरीद की गई, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान होने की आशंका जताई गई है।
सतर्कता निदेशालय ने शुरू की जांच
शिकायत मिलने के बाद Vigilance Department ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। विभाग अब खरीद प्रक्रिया, टेंडर दस्तावेजों और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि प्राथमिक जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो विस्तृत जांच और आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दस्तावेजों की हो रही जांच
जांच टीम ने संबंधित फाइलें, टेंडर रिकॉर्ड और सप्लाई ऑर्डर की समीक्षा शुरू कर दी है। यह भी देखा जा रहा है कि किन अधिकारियों की भूमिका इस प्रक्रिया में रही और क्या नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की खरीद प्रक्रिया और पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल सप्लाई सिस्टम में किसी भी तरह की अनियमितता सीधे मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित कर सकती है।
आगे की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल सतर्कता विभाग की जांच प्रारंभिक चरण में है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और किस स्तर पर गड़बड़ी हुई है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने सभी संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं और जांच आगे बढ़ाई जा रही है।