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आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा का बयान: जेन-जी को किसी नेता की जरूरत नहीं, उनका आंदोलन खुद का है

 

छात्र संगठन आइसा (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने जेन-जी आंदोलन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जेन-जी को किसी अभिजीत दीपके या उनकी जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर हुआ आंदोलन युवाओं का अपना आंदोलन था और इसे किसी एक व्यक्ति या संगठन से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

नेहा बोरा ने कहा कि देशभर में छात्र और युवा अब खुद सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को समझ रहे हैं। वे सिस्टम की कमियों को पहचान रहे हैं और उसमें सुधार के तरीकों पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवा अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर खुद आवाज उठा रहे हैं और उन्हें किसी बाहरी नेतृत्व की आवश्यकता नहीं है।

आइसा अध्यक्ष ने कहा कि आज के दौर में छात्र पहले से ज्यादा जागरूक हैं। वे शिक्षा, रोजगार, व्यवस्था और समाज से जुड़े मुद्दों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र अपने स्तर पर समस्याओं को उठाकर समाधान की मांग कर रहे हैं।

उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि युवाओं की सामूहिक आवाज थी। नेहा बोरा के मुताबिक, जेन-जी अपने मुद्दों को लेकर खुद आगे आ रहे हैं और अपनी बात रखने में सक्षम हैं।

उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब युवाओं के आंदोलनों और उनमें राजनीतिक संगठनों की भूमिका को लेकर बहस चल रही है। कई बार छात्र आंदोलनों में राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में नेहा बोरा ने स्पष्ट किया कि युवा आंदोलनों की दिशा और नेतृत्व युवाओं के हाथ में होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी केवल विरोध करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह व्यवस्था को समझने और उसमें बदलाव लाने की क्षमता रखती है। उनके अनुसार, जेन-जी अपने मुद्दों को लेकर अधिक सक्रिय और जागरूक है और वह खुद अपनी लड़ाई लड़ सकती है।

नेहा बोरा के इस बयान के बाद छात्र राजनीति में एक बार फिर युवाओं की भूमिका और आंदोलनों में नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है।