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नोएडा में सेक्टर-3 से सेक्टर-60 तक बनेगी 6 लेन की एलिवेटेड रोड, 850 करोड़ होंगे खर्च; DND से सेक्टर-62 का सफर होगा आसान

 

नोएडा में ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए एक नई एलिवेटेड रोड बनाने की तैयारी तेज हो गई है। सेक्टर-3 स्थित रजनीगंधा अंडरपास से सेक्टर-60 तक प्रस्तावित छह लेन की एलिवेटेड रोड की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार हो गई है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रुड़की ने यह रिपोर्ट तैयार की है। करीब 5.49 किलोमीटर लंबी इस परियोजना पर लगभग 850 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके बनने से दिल्ली के डीएनडी फ्लाईवे से नोएडा के सेक्टर-62 तक आने-जाने वाले वाहन चालकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

सेक्टर-3 से शुरू होकर सेक्टर-60 तक जाएगी सड़क

प्रस्तावित एलिवेटेड रोड मास्टर प्लान रोड-1 पर बनाई जाएगी। यह सेक्टर-3 के रजनीगंधा अंडरपास के पास से शुरू होकर सेक्टर-10, सेक्टर-12 और सेक्टर-22 के टी-प्वाइंट से होते हुए सेक्टर-57 चौराहे को पार करेगी। इसके बाद सड़क सेक्टर-60 के सामने नीचे उतरेगी।

इस मार्ग से सेक्टर-59, 62, 63, 73 और 121 सहित आसपास के औद्योगिक व आवासीय क्षेत्रों तक पहुंचना आसान हो सकता है। इससे नोएडा के अंदरूनी यातायात के साथ गाजियाबाद की ओर जाने वाले वाहन चालकों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।

सेक्टर-12 और 22 के टी-प्वाइंट पर खास डिजाइन

इस परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा सेक्टर-12 और सेक्टर-22 के टी-प्वाइंट को माना जा रहा है। यहां एलिवेटेड रोड को मोड़ देने के लिए विशेष कर्व डिजाइन तैयार किया गया है। इस हिस्से में डिजाइन और यातायात के प्रवाह का ध्यान रखना जरूरी है, ताकि वाहन आसानी से गुजर सकें और किसी एक चौराहे पर जाम का दबाव न बढ़े।

DPR के बाद लागत और टेंडर की प्रक्रिया

नोएडा प्राधिकरण ने IIT रुड़की के साथ मिलकर परियोजना की योजना तैयार कराई है। अब DPR मिलने के बाद प्राधिकरण लागत, डिजाइन और निर्माण से जुड़ी तकनीकी जानकारियों की जांच करेगा। इसके बाद परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी मंजूरियां और टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाएगी। फिलहाल निर्माण शुरू होने और सड़क चालू होने की तारीख घोषित नहीं हुई है।

डीएनडी से सेक्टर-62 तक सफर होगा सुगम

वर्तमान में रजनीगंधा चौराहे, सेक्टर-12/22 टी-प्वाइंट और सेक्टर-56 तिराहे के आसपास व्यस्त समय में वाहनों का दबाव बढ़ जाता है। एलिवेटेड रोड बनने के बाद दिल्ली से आने वाले वाहन चालकों को नोएडा के कई व्यस्त चौराहों से होकर गुजरने की जरूरत कम हो सकती है।

इस परियोजना से रोजाना दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद के बीच सफर करने वाले कर्मचारियों, कारोबारियों और स्थानीय निवासियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि, जाम से कितनी राहत मिलेगी, यह सड़क के अंतिम डिजाइन, प्रवेश-निकास व्यवस्था और आसपास की सड़कों के यातायात प्रबंधन पर निर्भर करेगा।