×

सत्य निकेतन हादसे से 3 महीने पहले पुलिस ने दी थी चेतावनी, एसडीएम को चिट्ठी लिखकर कहा था- जल्द कार्रवाई करें

 

दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढहने से सात लोगों की मौत के बाद अब प्रशासनिक लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जांच में सामने आया है कि हादसे से करीब तीन महीने पहले ही दिल्ली पुलिस ने इलाके में मौजूद सुरक्षा संबंधी खतरों को लेकर चिंता जताई थी। पुलिस ने एसडीएम को पत्र लिखकर सत्य निकेतन इलाके में जल्द से जल्द कार्रवाई करने की सलाह दी थी।

हौज रानी B&B अग्निकांड के बाद पुलिस ने किया था आगाह

दिल्ली पुलिस की यह चेतावनी हौज रानी में एक B&B में हुई भीषण आग की घटना के बाद की गई जांच के दौरान सामने आई थी। उस अग्निकांड ने राजधानी में अवैध निर्माण, सुरक्षा मानकों और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। जांच के दौरान पुलिस और अन्य एजेंसियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे थे।

रिपोर्टों के मुताबिक, हौज रानी मामले में जांच के दौरान अनधिकृत निर्माण और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन से जुड़ी चिंताएं सामने आई थीं। इसी पृष्ठभूमि में सत्य निकेतन जैसे इलाकों में भी समय रहते कार्रवाई की जरूरत बताई गई थी।

चेतावनी के बावजूद नहीं टला खतरा

अब सत्य निकेतन में हादसा होने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि अगर पुलिस ने तीन महीने पहले ही इलाके को लेकर चिंता जताई थी, तो उस पर समय रहते क्या कार्रवाई हुई? पांच मंजिला इमारत के गिरने के बाद सामने आया कि भवन में कई तरह के नियमों के उल्लंघन के आरोप थे। जांच में बिना स्वीकृत बिल्डिंग प्लान, अनधिकृत बेसमेंट और फायर NOC से जुड़े मुद्दे भी सामने आए हैं।

हादसे के बाद दिल्ली में अवैध और असुरक्षित इमारतों के खिलाफ कार्रवाई तेज की गई है। MCD ने सत्य निकेतन इलाके में PG इमारतों का सर्वे भी शुरू किया है और कुछ इमारतों को खतरनाक पाया गया है।

अब उठ रहा है जवाबदेही का सवाल

सत्य निकेतन हादसे के बाद पुलिस की पुरानी चेतावनी सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है। अब जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि पुलिस की ओर से दी गई सूचना के बाद संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों ने क्या कदम उठाए थे।

हादसे के बाद कई अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है और मामले की जांच चल रही है। ऐसे में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि तीन महीने पहले मिली चेतावनी के बावजूद खतरे को दूर करने के लिए प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी। सत्य निकेतन हादसा अब सिर्फ एक इमारत गिरने की घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह दिल्ली में भवन सुरक्षा, निगरानी और सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय पर भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है।