ग्रेटर नोएडा में महंगाई का असर, पेयजल शुल्क में 10% की बढ़ोतरी लागू
महंगाई के बीच ग्रेटर नोएडा के निवासियों के लिए एक और निराश करने वाली खबर सामने आई है। 1 अप्रैल से शहर में पेयजल शुल्क में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी लागू कर दी गई है। इस फैसले का सीधा असर आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक—सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। यानी अब लोगों को पानी के उपयोग के लिए पहले की तुलना में अधिक भुगतान करना होगा।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, यह वृद्धि एक पूर्व निर्धारित नीति के तहत की गई है। वर्ष 2013 में हुई प्राधिकरण की 95वीं बोर्ड बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि हर वित्तीय वर्ष में पेयजल दरों में 10 प्रतिशत की नियमित बढ़ोतरी की जाएगी। इसी नीति के तहत हर साल दरों में संशोधन किया जाता है और इस वर्ष भी इसे लागू कर दिया गया है।
प्राधिकरण का कहना है कि पेयजल आपूर्ति व्यवस्था के रखरखाव, संचालन लागत और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए यह बढ़ोतरी आवश्यक है। अधिकारियों के अनुसार, बढ़ती लागत और सेवाओं को बेहतर बनाए रखने के लिए समय-समय पर शुल्क में संशोधन करना जरूरी हो जाता है।
हालांकि, इस फैसले से स्थानीय निवासियों में असंतोष भी देखने को मिल रहा है। कई लोगों का कहना है कि पहले से ही बिजली, पानी और अन्य जरूरी सेवाओं की लागत बढ़ती जा रही है, ऐसे में पानी के बिल में हर साल होने वाली वृद्धि आम बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है। खासकर मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी चिंता का विषय बन गई है।
व्यावसायिक और औद्योगिक इकाइयों पर भी इस फैसले का असर पड़ेगा। उद्योगों और कारोबारियों के अनुसार, पानी की लागत बढ़ने से उत्पादन खर्च में भी वृद्धि होगी, जिसका असर अंततः उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।
गौरतलब है कि ग्रेटर नोएडा एक तेजी से विकसित होता शहर है, जहां आवासीय और औद्योगिक दोनों क्षेत्रों में लगातार विस्तार हो रहा है। ऐसे में बुनियादी सेवाओं की मांग भी तेजी से बढ़ रही है, जिसके कारण प्राधिकरण समय-समय पर शुल्क संरचना में बदलाव करता रहता है।
कुल मिलाकर, पेयजल शुल्क में यह 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी जहां प्रशासनिक नीति का हिस्सा बताई जा रही है, वहीं आम लोगों के लिए यह एक और आर्थिक बोझ के रूप में सामने आई है।