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अदालत के फैसले से हमारी सोच नहीं बदलेगी; बघेल ने झीरम हमला मामले में कोर्ट के फैसले को क्यों बताया अधूरा
 

 

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में एनआईए की विशेष अदालत के फैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने इसे लेकर सवाल उठाए हैं। 16 सितंबर को अदालत ने मामले में दोषी ठहराए गए 10 लोगों को मौत की सजा सुनाई। इसके बाद बघेल ने कहा कि अदालत के फैसले से उनकी सोच बदलने का सवाल ही नहीं है और उनके मुताबिक झीरम मामले में न्याय अभी अधूरा है।

बघेल ने फैसले को क्यों बताया अधूरा?

भूपेश बघेल का मुख्य सवाल झीरम हमले की कथित बड़ी साजिश की जांच को लेकर है। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले में उन लोगों पर कार्रवाई नहीं हुई, जिन्हें वह हमले का मुख्य साजिशकर्ता मानते हैं। बघेल के अनुसार, केवल हमले में शामिल आरोपियों को सजा मिलने से पूरे मामले की सच्चाई सामने नहीं आती।

बघेल ने आरोप लगाया कि एनआईए ने झीरम हमले के पीछे की कथित राजनीतिक साजिश की पूरी जांच नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के दौरान कुछ बड़े नक्सली नेताओं के नाम और भूमिका सामने आने के बावजूद उन पर आरोप नहीं लगाए गए। ये बघेल के राजनीतिक आरोप हैं; दूसरी ओर भाजपा ने अदालत के फैसले और एनआईए की जांच का समर्थन किया है।

2013 में हुआ था भीषण हमला

झीरम घाटी में 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान माओवादी हमला हुआ था। इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा और उदय मुदलियार समेत कई लोगों की मौत हुई थी। कुल मृतकों की संख्या 29 बताई गई है।

हमले के बाद मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए को सौंपी गई थी। वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद सितंबर 2026 में विशेष अदालत ने मामले में 10 आरोपियों को दोषी करार दिया। इसके बाद 16 सितंबर को अदालत ने सभी 10 दोषियों को मौत की सजा सुनाई।

कांग्रेस नेताओं ने उठाए सुरक्षा से जुड़े सवाल

बघेल के अलावा कांग्रेस नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने भी फैसले के बाद कुछ सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल दोषियों को सजा मिलने से यह सवाल खत्म नहीं होता कि हमले के दिन कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं थी। सिंहदेव ने दावा किया कि यात्रा के कार्यक्रम की जानकारी प्रशासन को पहले से दी गई थी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लिखित सूचना भी उपलब्ध कराई गई थी।

वहीं, भाजपा की ओर से अदालत के फैसले का स्वागत किया गया है। भाजपा नेताओं ने इसे लंबे समय से चले आ रहे मामले में महत्वपूर्ण न्यायिक फैसला बताया और एनआईए की जांच का बचाव किया।

इस तरह झीरम घाटी मामले में अदालत का फैसला आने के बावजूद राजनीतिक साजिश और हमले की पूरी पृष्ठभूमि की जांच को लेकर बहस जारी है। बघेल का कहना है कि जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक इस मामले को पूरी तरह सुलझा हुआ नहीं माना जा सकता।