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छह साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या, आरोपी को मौत की सजा; कोर्ट ने माना ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’

 

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में छह साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष पॉक्सो फास्ट ट्रैक अदालत ने 24 वर्षीय आरोपी को दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ यानी दुर्लभतम मामलों में दुर्लभ श्रेणी का माना। साथ ही पीड़ित परिवार को राज्य शासन की आहत प्रतिकर योजना के तहत सात लाख रुपये की सहायता देने का निर्देश दिया गया है।

वाहन में मिली थी बच्ची

पुलिस के मुताबिक, पिछले साल 6 अप्रैल को छह साल तीन महीने की बच्ची के लापता होने की सूचना मिली थी। इसके बाद मोहन नगर थाने में मामला दर्ज कर बच्ची की तलाश शुरू की गई। कुछ समय बाद बच्ची एक वाहन में मृत हालत में मिली। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए विशेष टीम गठित की।

चाचा पर लगा था वारदात का आरोप

पुलिस जांच के अनुसार, बच्ची पड़ोस में अपनी दादी के घर आयोजित एक कार्यक्रम में गई थी। आरोप है कि इसी दौरान उसके 24 वर्षीय चाचा ने उसके साथ यौन अपराध किया और उसकी हत्या कर दी। पुलिस के मुताबिक, बाद में बच्ची के शव को एक पड़ोसी की कार में रख दिया गया था।

जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल और आसपास से कई महत्वपूर्ण भौतिक एवं जैविक साक्ष्य जुटाए। आरोपी के कपड़े, बाल और अन्य नमूनों के साथ डीएनए सैंपल वैज्ञानिक जांच के लिए भेजे गए। इसके अलावा आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और डीवीआर भी जांच का हिस्सा बनाए गए।

डीएनए और फॉरेंसिक सबूत बने अहम कड़ी

अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने डीएनए, फॉरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों समेत अन्य प्रमाण पेश किए। इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी माना। विशेष पॉक्सो अदालत ने पॉक्सो अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत सजा सुनाई।

अदालत ने अपराध की प्रकृति, बच्ची की उम्र और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ माना और मृत्युदंड का फैसला सुनाया। हालांकि, मृत्युदंड की पुष्टि के लिए मामला नियमानुसार छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के समक्ष जाएगा।

पीड़ित परिवार को सात लाख रुपये की सहायता

अदालत ने पीड़ित परिवार को राज्य शासन की आहत प्रतिकर योजना के तहत सात लाख रुपये की सहायता राशि देने का भी निर्देश दिया है। इस फैसले को नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में कड़ा न्यायिक संदेश माना जा रहा है।