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नक्सल मुक्त पंचायतों के 1 करोड़ रुपये के वादे पर सियासत तेज, बघेल ने उठाए सवाल—‘कितनी पंचायतों को मिला पैसा?’

 

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद और विकास योजनाओं को लेकर एक बार फिर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए नक्सल मुक्त पंचायतों को दिए जाने वाले 1 करोड़ रुपये के वादे को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

बघेल ने केंद्र सरकार से पूछा है कि जिन नक्सल मुक्त पंचायतों को 1 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का ऐलान किया गया था, आखिर अब तक कितनी पंचायतों को यह राशि जारी की गई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि सरकार ने अपना वादा पूरा नहीं किया है, तो केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah को बस्तर की जनता से माफी मांगनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई केवल घोषणाओं से नहीं जीती जा सकती, बल्कि इसके लिए जमीन पर ठोस काम और पारदर्शी तरीके से योजनाओं का क्रियान्वयन जरूरी है। बघेल के अनुसार, यदि पंचायतों को घोषित राशि नहीं मिल रही है तो यह ग्रामीण विकास और सुरक्षा रणनीति दोनों पर सवाल खड़े करता है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार बस्तर और अन्य नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास और सुरक्षा को एक साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। हाल ही में सरकार ने सुरक्षा कैंपों को ‘जन सेवा केंद्र’ में बदलने और ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं को पहुंचाने जैसी योजनाओं को आगे बढ़ाया है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सरकार की कई योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह जाती हैं और जमीनी स्तर पर उनका लाभ लोगों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाता। उन्होंने कहा कि नक्सल मुक्त पंचायतों को प्रोत्साहन देने की योजना भी अगर लागू नहीं हो रही है, तो यह बेहद गंभीर मामला है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को लेकर केंद्र और राज्य के बीच समन्वय हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है। ऐसे में विकास योजनाओं और सुरक्षा रणनीतियों पर राजनीतिक बयानबाजी अक्सर तेज हो जाती है, जिसका असर जनमानस पर भी पड़ता है।

दूसरी ओर, केंद्र सरकार का पक्ष यह रहा है कि नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को तेज करने के साथ-साथ विकास कार्यों को भी प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति और विश्वास का माहौल बनाया जा सके।

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास योजनाओं का क्रियान्वयन कितनी प्रभावी तरीके से हो रहा है और क्या राजनीतिक घोषणाएं जमीनी हकीकत में बदल पा रही हैं या नहीं।

फिलहाल, इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक बयान और तेज होने की संभावना है।