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कुख्यात नक्सली पापाराव ने किया आत्मसमर्पण, बस्तर में ‘लाल आतंक’ के एक दौर का अंत

 

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सल मोर्चे से जुड़ी एक बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। दशकों तक सुरक्षाबलों के लिए चुनौती बने कुख्यात नक्सली कमांडर पापाराव ने आखिरकार हथियार डाल दिए हैं। उसके साथ उसके 18 साथियों ने भी आत्मसमर्पण किया है, जिसे सुरक्षा एजेंसियां एक बड़ी सफलता के रूप में देख रही हैं।

बस्तर के घने जंगलों में सक्रिय पापाराव का नाम लंबे समय तक सुकमा से लेकर बीजापुर तक फैले नक्सली नेटवर्क के प्रमुख चेहरों में शामिल रहा है। सुरक्षा बलों के अनुसार, वह संगठन की रणनीति और कई बड़े हमलों में अहम भूमिका निभाता रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, लगातार बढ़ते सुरक्षा अभियानों, दबाव और संगठन के भीतर घटते प्रभाव के चलते पापाराव ने आत्मसमर्पण का निर्णय लिया। उसके इस कदम को बस्तर में वर्षों से चले आ रहे “लाल आतंक” के एक बड़े अध्याय के अंत के रूप में देखा जा रहा है।

आत्मसमर्पण के बाद प्रशासन ने इसे नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार की पुनर्वास नीति और सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई ने नक्सलियों के आत्मसमर्पण की प्रक्रिया को तेज किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पापाराव जैसे वरिष्ठ कमांडर का मुख्यधारा में लौटना न केवल संगठन के लिए बड़ा झटका है, बल्कि इससे क्षेत्र में शांति और विकास की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।

स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर राहत और उम्मीद का माहौल देखा जा रहा है, क्योंकि वर्षों से नक्सली गतिविधियों के कारण कई इलाकों में विकास कार्य प्रभावित रहे हैं।

निष्कर्षतः, पापाराव और उसके साथियों का आत्मसमर्पण बस्तर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है, जो क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।