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माओवाद के साए से इको टूरिज्म की पहचान तक: गरियाबंद का कुल्हाड़ीघाट बना हॉर्नबिल सफारी का नया ठिकाना

 

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले का कुल्हाड़ीघाट कभी माओवाद और सुरक्षा बलों के बीच होने वाली मुठभेड़ों के लिए जाना जाता था। लेकिन अब यही इलाका अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और जैव विविधता के कारण इको टूरिज्म के नए केंद्र के रूप में पहचान बना रहा है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में शुरू हुई हॉर्नबिल सफारी देशभर के पर्यटकों को आकर्षित कर रही है।

बदल रही है इलाके की पहचान

कुल्हाड़ीघाट का नाम लंबे समय तक नक्सली गतिविधियों और सुरक्षा चुनौतियों से जुड़ा रहा। कभी जहां आम लोगों की आवाजाही सीमित थी, वहीं अब यह क्षेत्र जंगल, वन्यजीव और प्राकृतिक सौंदर्य के प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहा है।

वन विभाग की पहल से यहां पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

हॉर्नबिल सफारी बनी आकर्षण का केंद्र

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में शुरू की गई हॉर्नबिल सफारी पर्यटकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यहां आने वाले पर्यटक दुर्लभ और खूबसूरत हॉर्नबिल पक्षियों को करीब से देखने का अनुभव ले रहे हैं।

हॉर्नबिल अपनी आकर्षक चोंच और अनोखी जीवनशैली के लिए पहचाने जाते हैं। जंगल के शांत वातावरण में इन पक्षियों को देखना पर्यटकों के लिए खास अनुभव साबित हो रहा है।

जंगल और जैव विविधता का खजाना

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहां घने जंगल, पहाड़ियां, नदियां और विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीव मौजूद हैं।

हॉर्नबिल के अलावा यहां कई अन्य पक्षी और वन्यजीव भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। यही वजह है कि अब यह क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के बीच लोकप्रिय हो रहा है।

स्थानीय लोगों को मिल रहा रोजगार

इको टूरिज्म के विकास से स्थानीय ग्रामीणों को भी फायदा मिल रहा है। गाइड, होमस्टे, परिवहन और अन्य पर्यटन सेवाओं के जरिए लोगों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।

प्रशासन और वन विभाग का प्रयास है कि पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ जंगल और वन्यजीवों का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाए।

सुरक्षा की तस्वीर भी बदली

जहां कभी कुल्हाड़ीघाट का नाम सुरक्षा अभियानों से जुड़ा रहता था, वहीं अब इसकी पहचान प्राकृतिक पर्यटन स्थल के रूप में बनने लगी है। यह बदलाव क्षेत्र में बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और विकास कार्यों का संकेत भी माना जा रहा है।

कुल्हाड़ीघाट की कहानी अब संघर्ष से पर्यटन तक के सफर की कहानी बन रही है। आने वाले समय में हॉर्नबिल सफारी और इको टूरिज्म के जरिए यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है।