केमिकल से नकली नोटों को असली बनाने का झांसा, 21 साल में अरबों की ठगी; कभी खुद भी बने थे शिकार
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के एक कारोबारी से 1.13 करोड़ रुपये की ठगी के मामले की जांच में रायपुर पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में मास्टरमाइंड समेत सात आरोपियों को पुणे के खंडाला स्थित एक रिसॉर्ट से गिरफ्तार किया है। इससे पहले दो महिला आरोपियों की गिरफ्तारी नागपुर से हुई थी। इस तरह मामले में अब तक नौ आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं। आरोपियों के पास से चार करोड़ रुपये से अधिक नकद, मोबाइल फोन और ठगी में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री बरामद की गई है।
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह लोगों को यह झांसा देता था कि विशेष केमिकल की मदद से नकली या काले नोटों को असली मुद्रा में बदला जा सकता है। इसके अलावा आरोपियों की ओर से रकम दोगुनी करने का लालच भी दिया जाता था। गिरोह कथित तौर पर वर्ष 2005 से सक्रिय था और पुलिस के मुताबिक 21 वर्षों के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में 100 से अधिक लोगों को अपना शिकार बना चुका है।
ऐसे बनाते थे भरोसे का जाल
आरोपी खुद को बड़े कारोबारी नेटवर्क और प्रभावशाली लोगों से जुड़ा बताते थे। कुछ मामलों में वे नेताओं और फिल्मी कलाकारों के साथ तस्वीरें दिखाकर अपना रसूख साबित करने की कोशिश करते थे। संभावित शिकार को महंगे होटल, विला और रिसॉर्ट में बुलाकर बैठकों का आयोजन किया जाता था।
इसके बाद विदेशी फंड, निवेश और रकम दोगुनी करने जैसी योजनाओं की जानकारी देकर पीड़ित को विश्वास में लिया जाता था। पुलिस के मुताबिक, गिरोह के पास नोट के आकार के काले कागज, कांच की प्लेटें और अन्य सामग्री रहती थी। इन्हीं के जरिए केमिकल से नोट को असली बनाने का कथित प्रदर्शन किया जाता था।
पहले छोटी रकम, फिर करोड़ों की ठगी
गिरोह पहले पीड़ित से छोटी रकम लेता था और उसे भरोसा दिलाने के लिए एक डेमो करता था। इसके बाद जब पीड़ित को कथित तौर पर विश्वास हो जाता था तो उससे बड़ी रकम मांगी जाती थी। बड़ी रकम मिलने के बाद आरोपी कागज की गड्डियों को नोटों जैसा दिखाकर पीड़ित को सौंप देते और वहां से फरार हो जाते थे।
कभी खुद भी हुए थे ठगी का शिकार
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि पुलिस जांच के अनुसार गिरोह से जुड़े कुछ आरोपी खुद भी इसी तरह की ठगी का शिकार हो चुके थे। बताया गया है कि वर्ष 2005 से पहले उन्हें इसी तरह के एक गिरोह ने ठगा था। रकम गंवाने के बाद उन्होंने उसी ठगी के तरीके को समझा और बाद में उसी मॉडल पर अपना नेटवर्क खड़ा कर लिया।
क्लब और वीआईपी कार्यक्रमों में तलाशते थे शिकार
पुलिस के मुताबिक गिरोह संभावित शिकार तलाशने के लिए अपने सदस्यों और एजेंटों को क्लब, पार्टियों, योग सेंटर और वीआईपी आयोजनों में भेजता था। यहां आर्थिक रूप से संपन्न लोगों से संपर्क बढ़ाया जाता था। इसके बाद उन्हें निवेश और पैसे दोगुने करने की योजनाओं का लालच देकर धीरे-धीरे अपने जाल में फंसाया जाता था।
बालोद के कारोबारी से ठगी की जांच के दौरान पुलिस को गिरोह के नेटवर्क की जानकारी मिली। डिजिटल इनपुट और आरोपियों के मोबाइल से मिले सुरागों के आधार पर पुलिस ने पुणे में कार्रवाई की। अब पुलिस गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों, पुराने आपराधिक मामलों, डिजिटल संपर्कों और देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद उनके सहयोगियों की जांच कर रही है।