देशभर से पहले इस गांव में मना ली गई दिवाली, छत्तीसगढ़ के सेमरा-सी में 3 नवंबर को ही हुआ दीपोत्सव
पूरा देश इन दिनों धनतेरस और दिवाली के त्योहार की तैयारियों में जुटा हुआ है। बाजारों में रौनक है और लोग घरों की साफ-सफाई से लेकर खरीदारी तक में व्यस्त हैं। देशभर में धनतेरस और 8 नवंबर को दिवाली मनाने की तैयारियां चल रही हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि छत्तीसगढ़ में एक ऐसा गांव भी है, जहां देश के बाकी हिस्सों से पहले ही दिवाली का त्योहार मना लिया गया? जी हां, धमतरी जिले का सेमरा-सी गांव अपनी अनोखी परंपरा के कारण चर्चा में है। यहां ग्रामीणों ने 3 नवंबर को ही दिवाली का पर्व धूमधाम से मना लिया।
धमतरी जिला मुख्यालय से करीब 22 किलोमीटर दूर स्थित सेमरा-सी गांव में दिवाली मनाने की यह परंपरा लोगों के लिए खास है। जब देश के दूसरे हिस्सों में लोग दिवाली की तैयारियों में जुटे थे, तब इस गांव में दीपोत्सव का आयोजन पूरा हो चुका था। ग्रामीणों ने अपनी परंपरा के अनुसार निर्धारित दिन पर पूजा-अर्चना की और दीप जलाकर त्योहार की खुशियां मनाईं।
परंपरा के अनुसार मनाते हैं दिवाली
सेमरा-सी गांव में दिवाली बाकी देश की तरह एक ही तारीख को मनाने की बजाय स्थानीय परंपरा के अनुसार मनाई जाती है। यही वजह है कि यहां दीपावली का आयोजन इस बार 3 नवंबर को किया गया। गांव के लोगों के लिए यह केवल त्योहार नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा का हिस्सा है।
ग्रामीण अपनी परंपराओं को आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाते हैं। त्योहार की तारीख अलग होने के बावजूद दिवाली का उत्साह और उल्लास यहां भी देखने को मिलता है। घरों में दीप जलाना, पूजा-पाठ करना और परिवार के साथ खुशियां बांटना इस पर्व का प्रमुख हिस्सा रहता है।
धमतरी से 22 किलोमीटर दूर है गांव
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले का सेमरा-सी गांव अपनी इसी विशेष पहचान के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। जिला मुख्यालय से लगभग 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह गांव अब अपनी अलग दिवाली परंपरा को लेकर चर्चा में है।
जब देश के अन्य हिस्सों में 8 नवंबर को दिवाली मनाई जाएगी, तब तक सेमरा-सी के ग्रामीण अपना दीपोत्सव मना चुके होंगे। इस तरह गांव की परंपरा देशभर में दिवाली की तारीख से अलग नजर आती है।
स्थानीय परंपराओं से जुड़ी है गांव की पहचान
भारत के अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में त्योहार मनाने के तरीके और उनसे जुड़ी परंपराएं अलग-अलग हैं। कई जगह स्थानीय मान्यताओं और रीति-रिवाजों के अनुसार धार्मिक पर्व मनाए जाते हैं। सेमरा-सी गांव भी ऐसी ही एक परंपरा के कारण खास पहचान रखता है।
हालांकि, गांव में दिवाली 3 नवंबर को मनाने के पीछे की विस्तृत धार्मिक मान्यता और परंपरा की जानकारी उपलब्ध नहीं है। लेकिन इतना जरूर है कि ग्रामीणों ने अपनी वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार इस बार भी समय से पहले दीपोत्सव मनाकर अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखा है।