बुजुर्ग सास को पीठ पर बैठाकर बैंक पहुंचाती है बहू, मैनपाट की महिला की संघर्षभरी कहानी ने जीता दिल
मैनपाट विकासखंड से इंसानियत और पारिवारिक जिम्मेदारी की मिसाल पेश करने वाली एक भावुक कहानी सामने आई है। कुनिया ग्राम पंचायत निवासी सुखमुनिया बाई अपनी बुजुर्ग सास को बैंक तक पहुंचाने के लिए कठिन पहाड़ी और दुर्गम रास्तों से पैदल सफर करती है।
जानकारी के मुताबिक इलाके में सड़क और यातायात की सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में बुजुर्ग महिला को बैंक ले जाना परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। लेकिन सुखमुनिया बाई ने हालात के आगे हार मानने के बजाय अपनी सास की जिम्मेदारी खुद उठाई।
बताया जा रहा है कि बैंक संबंधी जरूरी काम और पेंशन निकालने के लिए बुजुर्ग महिला को बैंक पहुंचाना जरूरी होता है। ऐसे में सुखमुनिया बाई अपनी सास को सहारा देकर या पीठ पर बैठाकर लंबा पैदल सफर तय करती है। रास्ते में ऊंची-नीची पहाड़ियां, कच्चे रास्ते और कठिन चढ़ाई होने के बावजूद वह बिना शिकायत यह जिम्मेदारी निभा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सुखमुनिया बाई का अपनी सास के प्रति समर्पण और सेवा भाव पूरे गांव के लिए प्रेरणा बन गया है। गांव के लोग उनकी मेहनत और परिवार के प्रति जिम्मेदारी की सराहना कर रहे हैं।
यह मामला ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को भी उजागर करता है। कई गांवों में आज भी बैंक, अस्पताल और सरकारी सेवाओं तक पहुंचने के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। खासकर बुजुर्गों और महिलाओं को इससे सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार को ऐसे दूरदराज क्षेत्रों में सड़क, परिवहन और बैंकिंग सुविधाओं को मजबूत करने की जरूरत है, ताकि ग्रामीणों को बुनियादी सेवाओं के लिए कठिन संघर्ष न करना पड़े।
वहीं सुखमुनिया बाई की कहानी सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींच रही है। लोग इसे परिवार के प्रति समर्पण, सेवा और भारतीय संस्कारों की मिसाल बता रहे हैं।
कठिन परिस्थितियों के बावजूद जिस तरह सुखमुनिया बाई अपनी बुजुर्ग सास का सहारा बनी हुई हैं, उसने हर किसी का दिल छू लिया है।