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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का डिजिटल कदम: गर्मियों की छुट्टियों में वर्चुअल सुनवाई, वर्क फ्रॉम होम और कारपूलिंग लागू

 

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने गर्मियों की छुट्टियों के दौरान न्यायिक कार्यों को सुचारू बनाए रखने और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए कई अहम और आधुनिक कदम उठाए हैं। इन उपायों के तहत अदालत ने मामलों की वर्चुअल सुनवाई, कर्मचारियों के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ और कारपूलिंग व्यवस्था को लागू करने का निर्णय लिया है।

अदालत प्रशासन के अनुसार, छुट्टियों के दौरान लंबित मामलों की सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए तकनीक आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है। वर्चुअल सुनवाई के माध्यम से वकीलों और पक्षकारों को भौतिक रूप से उपस्थित हुए बिना ही अपने मामलों में भाग लेने की सुविधा दी जाएगी।

इसके अलावा, न्यायालय ने अपने कर्मचारियों के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ व्यवस्था भी लागू की है। इसका उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों को बिना रुकावट जारी रखना और कार्यालय में भीड़ को कम करना है। अधिकारियों का कहना है कि इससे कार्यक्षमता बनी रहेगी और कार्यस्थल पर संसाधनों का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा।

एक और महत्वपूर्ण पहल के रूप में कारपूलिंग व्यवस्था को भी लागू किया गया है। इस कदम का उद्देश्य यात्रा के दौरान समय और ईंधन की बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। अदालत प्रशासन का मानना है कि इससे ट्रैफिक दबाव में भी कमी आएगी और कर्मचारियों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित होगी।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम न्यायिक प्रणाली में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। वर्चुअल सुनवाई जैसी व्यवस्थाएं पहले भी महामारी के दौरान अपनाई गई थीं और अब इन्हें स्थायी रूप से अधिक प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है।

वकीलों के एक वर्ग ने इस निर्णय का स्वागत किया है, जबकि कुछ ने तकनीकी चुनौतियों और नेटवर्क समस्याओं को लेकर चिंता जताई है। हालांकि, अदालत प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि सभी आवश्यक तकनीकी सहायता और सपोर्ट सिस्टम उपलब्ध कराए जाएंगे।

पर्यावरण विशेषज्ञों ने कारपूलिंग को एक सराहनीय कदम बताया है, जिससे न केवल संसाधनों की बचत होगी बल्कि कार्बन उत्सर्जन को भी कम करने में मदद मिलेगी।

फिलहाल यह व्यवस्था गर्मियों की छुट्टियों के दौरान लागू रहेगी और इसके परिणामों के आधार पर आगे इसे स्थायी नीति के रूप में भी अपनाने पर विचार किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का यह कदम न्यायिक प्रणाली में आधुनिकता और दक्षता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।