×

दुर्ग में 6 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या, आरोपी चाचा को फांसी की सजा

 

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में छह साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। विशेष पॉक्सो फास्ट ट्रैक अदालत ने मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी का मानते हुए यह फैसला सुनाया। आरोपी बच्ची का चाचा था। अदालत के फैसले के बाद पीड़ित परिवार को राज्य शासन की आहत प्रतिकर योजना के तहत सात लाख रुपये की सहायता देने का भी निर्देश दिया गया है।

कन्या भोज के दौरान गायब हुई थी मासूम

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, घटना पिछले साल रामनवमी के दिन की है। धार्मिक आयोजन के दौरान बच्ची कन्या भोज में शामिल हुई थी। इसी दौरान आरोपी उसे अपने साथ ले गया। बाद में बच्ची के लापता होने से परिवार में हड़कंप मच गया और उसकी तलाश शुरू की गई।

जांच के दौरान बच्ची का शव एक वाहन से बरामद हुआ। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची के साथ यौन अपराध किए जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज करते हुए आरोपी के खिलाफ साक्ष्य जुटाए।

अदालत ने दोषी को सुनाई फांसी

दुर्ग की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, चतुर्थ फास्ट ट्रैक कोर्ट एवं विशेष पॉक्सो न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। अदालत ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 6(1) और भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत मौत की सजा के साथ दोनों धाराओं में पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।

इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता की धारा 238(क) के तहत पांच वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई। ये सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

जांच में सामने आए अहम सबूत

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कई साक्ष्य जुटाए। रिपोर्ट के अनुसार, बच्ची के गायब होने के बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की और जांच आगे बढ़ने पर आरोपी तक पहुंची। अदालत के समक्ष अभियोजन पक्ष ने मामले से जुड़े साक्ष्य और परिस्थितियां रखीं, जिसके आधार पर आरोपी को दोषी माना गया।

अदालत ने अपराध की गंभीरता और बच्ची की कम उम्र को देखते हुए इसे असाधारण रूप से जघन्य अपराध माना। इसी आधार पर सामान्य सजा के बजाय मृत्युदंड सुनाया गया।

पीड़ित परिवार को 7 लाख रुपये की सहायता

अदालत ने दोषी को सजा सुनाने के साथ पीड़ित परिवार के लिए भी राहत का आदेश दिया है। राज्य शासन की आहत प्रतिकर योजना के तहत परिवार को सात लाख रुपये की सहायता राशि देने का निर्देश दिया गया है।

छह साल की बच्ची के साथ हुए इस जघन्य अपराध के मामले में अदालत के फैसले को बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों की गंभीरता को रेखांकित करने वाला फैसला माना जा रहा है। मामले में मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद अब आगे की कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।