बिहार में UCC लागू हुआ तो क्या बदलेगा? लिव-इन रजिस्ट्रेशन से बहुविवाह पर रोक तक, जानिए पूरी तस्वीर
समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर चर्चा तेज है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल में कहा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा। हालांकि बिहार को लेकर तस्वीर अलग है। जनता दल यूनाइटेड की ओर से बिहार में UCC लागू करने पर आपत्ति जताई गई है और पार्टी ने कहा है कि इस विषय पर जल्दबाजी के बजाय प्रस्तावित कानून का अध्ययन और व्यापक चर्चा जरूरी है।
ऐसे में सवाल है कि अगर भविष्य में बिहार में UCC लागू होता है तो आम लोगों की निजी जिंदगी से जुड़े कौन-कौन से नियम बदल सकते हैं?
लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन
UCC के जिन मॉडल को अलग-अलग राज्यों में लागू या प्रस्तावित किया गया है, उनमें लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण एक प्रमुख प्रावधान रहा है। उत्तराखंड में लागू UCC में लिव-इन संबंधों की जानकारी रजिस्टर कराने की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य ऐसे संबंधों में रहने वाले लोगों और उनसे जुड़े बच्चों के अधिकारों को कानूनी सुरक्षा देना बताया गया है।
हालांकि बिहार में ऐसा कोई कानून फिलहाल लागू नहीं है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि बिहार में अभी लिव-इन कपल के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है।
एक से ज्यादा शादी पर रोक
UCC मॉडल में बहुविवाह यानी एक समय में एक से अधिक विवाह पर रोक का प्रावधान भी शामिल रहा है। उत्तराखंड के UCC में इस तरह की व्यवस्था लागू की गई है। दूसरे राज्यों के प्रस्तावित UCC कानूनों में भी विवाह को लेकर समान नियमों की चर्चा हुई है।
यानी यदि बिहार भविष्य में इसी तरह का प्रावधान अपनाता है तो अलग-अलग धार्मिक व्यक्तिगत कानूनों के बजाय विवाह के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू हो सकती है। हालांकि बिहार के लिए अंतिम प्रावधान तभी स्पष्ट होंगे जब राज्य में कोई विधेयक तैयार और पारित होगा।
शादी और तलाक के नियमों में समानता
UCC का मूल उद्देश्य अलग-अलग धार्मिक समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों की जगह विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और अन्य पारिवारिक मामलों में समान कानूनी ढांचा तैयार करना है। उत्तराखंड में लागू कानून में विवाह और तलाक के पंजीकरण तथा उत्तराधिकार से जुड़े समान नियम शामिल हैं।
इसका मतलब यह है कि भविष्य में बिहार में UCC का कोई मॉडल लागू होने पर शादी, तलाक और संपत्ति से जुड़े नियमों में धर्म के आधार पर अलग-अलग प्रावधानों की जगह समान नियम बनाए जा सकते हैं।
नीतीश कुमार और JDU का रुख क्या है?
UCC को लेकर नीतीश कुमार और जेडीयू का रुख हाल के दिनों में चर्चा का विषय रहा है। 2017 में नीतीश कुमार ने विधि आयोग को लिखे पत्र में कहा था कि UCC को धार्मिक समूहों, खासकर अल्पसंख्यकों की सहमति के बिना जल्दबाजी में लागू नहीं किया जाना चाहिए।
सितंबर 2026 में जेडीयू की ओर से बिहार में UCC लागू करने पर आपत्ति जताई गई है। वहीं पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी की ओर से प्रस्तावित कानून को समझने और केंद्र के साथ चर्चा की बात सामने आई है। इसलिए मौजूदा स्थिति को सीधे समर्थन या विरोध के अंतिम फैसले के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
फिलहाल बिहार में UCC लागू नहीं है। इसलिए लिव-इन रजिस्ट्रेशन, बहुविवाह पर रोक, समान तलाक नियम या उत्तराधिकार जैसे बदलाव अभी बिहार के नागरिकों पर लागू नहीं होते। इन मामलों में वास्तविक बदलाव तभी होंगे जब बिहार सरकार और विधानसभा किसी कानून को मंजूरी देकर उसे लागू करें।