गयाजी में गिरे उल्कापिंड से बनी 2 करोड़ की घड़ी: दुनिया में सिर्फ एक पीस, 18 कैरेट गोल्ड और चार माणिक से सजी; जानिए खासियत
बिहार के गया जिले के शेरघाटी में करीब 161 साल पहले गिरे एक उल्कापिंड का टुकड़ा अब करोड़ों रुपये की लग्जरी घड़ी का हिस्सा बन गया है। स्विट्जरलैंड की मशहूर लग्जरी घड़ी निर्माता कंपनी लुई मोइनेट ने इस खास घड़ी को तैयार किया है। ‘ONLY INDIA’ नाम की इस घड़ी की अनुमानित कीमत 2 करोड़ 10 लाख रुपये से ज्यादा बताई जा रही है। खास बात यह है कि दुनिया में इस मॉडल का सिर्फ एक ही पीस बनाया गया है।
घड़ी में इस्तेमाल किया गया उल्कापिंड वही है, जो 25 अगस्त 1865 को बिहार के तत्कालीन शेरगोटी और वर्तमान शेरघाटी क्षेत्र में गिरा था। वैज्ञानिकों के अनुसार यह मंगल ग्रह से आया उल्कापिंड है, जिसे ‘Shergotty Martian Meteorite’ के नाम से जाना जाता है।
मंगल ग्रह के उल्कापिंड का इस्तेमाल
इस घड़ी के डायल में Shergotty Martian Meteorite का असली और प्रमाणित टुकड़ा इस्तेमाल किया गया है। यह उल्कापिंड वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसकी उत्पत्ति मंगल ग्रह से हुई है।
25 अगस्त 1865 को शेरघाटी में गिरने वाले इस उल्कापिंड का मूल वजन करीब 5 किलोग्राम दर्ज किया गया था। बाद में इसके टुकड़ों को वैज्ञानिक अध्ययन और संग्रह के लिए अलग-अलग संस्थानों में संरक्षित किया गया। अब इसी ऐतिहासिक उल्कापिंड का एक हिस्सा दुनिया की सबसे खास लग्जरी घड़ियों में शामिल हो गया है।
18 कैरेट रेड गोल्ड से बना केस
घड़ी की खूबसूरती बढ़ाने के लिए इसके केस में 18 कैरेट रेड गोल्ड का इस्तेमाल किया गया है। केस पर हाथ से बारीक नक्काशी की गई है। इसके लग्स पर चार रूबी यानी माणिक लगाए गए हैं, जो घड़ी को शाही लुक देते हैं।
डायल में केवल उल्कापिंड ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति से जुड़े कई प्रतीकों को भी जगह दी गई है। इसमें भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर से प्रेरित असली मोर पंख का इस्तेमाल किया गया है। इस वजह से घड़ी का डिजाइन भारत की परंपरा, कला और शिल्पकला से जुड़ा हुआ दिखाई देता है।
अशोक चक्र से प्रेरित धर्म चक्र
घड़ी के डायल पर अशोक चक्र से प्रेरित 20 तीलियों वाला धर्म चक्र बनाया गया है। इसे हाथ से नक्काशी कर तैयार किया गया है। चक्र के केंद्र और तीलियों पर बेहद बारीक माइक्रो-पेंटिंग की गई है।
कंपनी के अनुसार, घड़ी के डायल पर मौजूद धर्म चक्र में गति का प्रभाव हाथ से की गई नक्काशी और पेंटिंग के जरिए तैयार किया गया है। इससे घड़ी में भारतीय राष्ट्रीय प्रतीकों और आधुनिक घड़ी निर्माण कला का अनोखा मेल दिखाई देता है।
टूरबिलॉन मूवमेंट और 72 घंटे का पावर रिजर्व
इस लग्जरी घड़ी में लुई मोइनेट का LM-35 मूवमेंट लगाया गया है। इसमें टूरबिलॉन मैकेनिज्म दिया गया है, जिसका घूमता हुआ केज डायल पर दिखाई देता है। कंपनी के मुताबिक, इस मूवमेंट को तैयार करने से पहले कई महीनों तक परीक्षण किया गया था।
घड़ी में मैनुअल वाइंडिंग सिस्टम है और यह करीब 72 घंटे का पावर रिजर्व देती है। इसकी फ्रीक्वेंसी 21,600 वाइब्रेशन प्रति घंटे बताई गई है। घड़ी का केस 47 मिलीमीटर का है और इसमें 19 ज्वेल्स का इस्तेमाल किया गया है। यह 30 मीटर तक वॉटर रेजिस्टेंस के साथ आती है।
कीमत से ज्यादा खास है इसका इतिहास
इस घड़ी की अनुमानित कीमत 2.1 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है। हालांकि, कंपनी की ओर से इसकी कोई निश्चित आधिकारिक बिक्री कीमत सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए इस रकम को अनुमानित कीमत के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
घड़ी की असली खासियत सिर्फ इसकी कीमत नहीं, बल्कि इसका ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्व है। बिहार की धरती पर गिरा मंगल ग्रह का उल्कापिंड अब भारतीय संस्कृति से प्रेरित एक अनोखी घड़ी में शामिल है। दुनिया में सिर्फ एक पीस होने के कारण यह घड़ी कलेक्टर्स और अंतरिक्ष से जुड़ी दुर्लभ वस्तुओं के शौकीनों के लिए बेहद खास मानी जा रही है।