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सर्वार्थ सिद्धि-रवि योग में विश्वकर्मा पूजा: कारखानों और गैराज में होगी विशेष पूजा-अर्चना, सूर्य का होगा कन्या राशि में गोचर

 

भगवान विश्वकर्मा की पूजा का पर्व इस बार विशेष संयोग में मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार विश्वकर्मा पूजा के दिन सूर्य देव कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। इसी दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का संयोग बनने की बात कही जा रही है। मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा देवताओं के शिल्पकार हैं और वास्तुकला, निर्माण तथा विभिन्न प्रकार के औजारों और मशीनों के अधिष्ठाता माने जाते हैं। इसलिए इस दिन कारखानों, वर्कशॉप, गैराज, निर्माण स्थलों और तकनीकी संस्थानों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

मशीनों और औजारों की होगी पूजा

विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर कारखानों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में मशीनों की साफ-सफाई की जाती है। इसके बाद विधि-विधान से भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। कई जगहों पर मशीनों, औजारों, वाहनों और काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को फूल-माला से सजाया जाता है।

गैराज और वर्कशॉप संचालक भी अपने यहां मौजूद औजारों और मशीनों की पूजा करते हैं। कर्मचारियों के लिए प्रसाद और भोजन की व्यवस्था भी की जाती है। मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से कार्यस्थल पर सुख-समृद्धि बनी रहती है और काम में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश

विश्वकर्मा पूजा के दिन सूर्य देव के कन्या राशि में गोचर का भी विशेष महत्व माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार सूर्य एक राशि में लगभग एक महीने तक रहते हैं। सूर्य के सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करने के साथ ही कन्या संक्रांति होती है।

कन्या राशि में सूर्य का गोचर ज्योतिष की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान कार्य, प्रशासन, सेवा और व्यावहारिक जिम्मेदारियों से जुड़े विषयों को महत्व मिलने की मान्यता है। हालांकि किसी व्यक्ति की कुंडली में गोचर का प्रभाव अलग-अलग हो सकता है।

सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग का संयोग

इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग बनने की भी जानकारी दी जा रही है। ज्योतिषीय मान्यताओं में सर्वार्थ सिद्धि योग को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। वहीं रवि योग को भी विशेष फलदायी योगों में शामिल किया जाता है।

इसी कारण विश्वकर्मा पूजा के दिन धार्मिक अनुष्ठान, मशीनों की पूजा और अन्य शुभ कार्यों को लेकर लोगों में विशेष उत्साह रहता है। कई औद्योगिक क्षेत्रों में सामूहिक पूजा और भंडारे का आयोजन भी किया जाता है।

क्यों खास है विश्वकर्मा पूजा

भगवान विश्वकर्मा को सृजन, निर्माण और शिल्पकला से जोड़ा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार उन्होंने देवताओं के लिए कई भव्य निर्माण किए थे। इसी वजह से इंजीनियर, कारीगर, शिल्पकार, मैकेनिक, मशीनरी से जुड़े कर्मचारी और कारोबारी इस दिन विशेष रूप से पूजा करते हैं।

विश्वकर्मा पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि श्रम और तकनीक के प्रति सम्मान का अवसर भी मानी जाती है। इस दिन काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की साफ-सफाई और उनकी पूजा कर लोग नए कार्य-वर्ष की शुरुआत के लिए शुभकामनाएं लेते हैं। कारखानों से लेकर छोटे गैराज और वर्कशॉप तक भगवान विश्वकर्मा की पूजा की तैयारियां की जाती हैं।