उत्तराखंड मंत्री के पति के बयान से बिहार की राजनीति में उबाल, कार्रवाई की मांग तेज
उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू द्वारा बिहार की लड़कियों को लेकर दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान ने बिहार की सियासत को पूरी तरह गरमा दिया है। बयान सामने आने के बाद राज्य में तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। विपक्ष ही नहीं, बल्कि एनडीए के सहयोगी दलों ने भी इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए साहू के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
राजद, कांग्रेस और जदयू के साथ-साथ एनडीए के घटक दल ‘हम’ (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा) ने भी इस बयान को बिहार और बिहारी महिलाओं का अपमान बताया है। नेताओं का कहना है कि इस तरह के बयान न केवल महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि पूरे राज्य की छवि को भी नुकसान पहुंचाते हैं। राजनीतिक दलों ने एक सुर में कहा है कि गिरधारी लाल साहू पर तत्काल कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
इस मामले में केंद्रीय मंत्री और हम पार्टी के संरक्षक जीतन राम मांझी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बयान को “बेहद निंदनीय और शर्मनाक” बताते हुए कहा कि बिहार की बेटियों के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। मांझी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह की भाषा और सोच रखने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि समाज में गलत संदेश न जाए।
वहीं, हम पार्टी के विधायक आईपी गुप्ता ने तो इस मामले में और भी आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि जो भी व्यक्ति गिरधारी लाल साहू को बिहार लाएगा, उसे 10 लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा। आईपी गुप्ता का कहना है कि साहू को बिहार आकर अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए और कानून का सामना करना चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल और तेज हो गई है।
राजद नेताओं ने इसे बिहारियों के स्वाभिमान से जुड़ा मामला बताया है। उनका कहना है कि आए दिन बाहर के कुछ नेता या उनके परिजन बिहार और यहां की महिलाओं को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां करते हैं, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कांग्रेस ने भी केंद्र और उत्तराखंड सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
जदयू नेताओं ने कहा कि बिहार की महिलाएं मेहनती, स्वाभिमानी और हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। ऐसे में इस तरह के बयान पूरे समाज को नीचा दिखाने का प्रयास हैं। पार्टी ने साफ किया कि चाहे बयान देने वाला किसी भी राजनीतिक दल या पद से जुड़ा हो, कानून सबके लिए समान है।
फिलहाल, बयान को लेकर सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त नाराजगी देखने को मिल रही है। लोग साहू के बयान की आलोचना करते हुए माफी और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि उत्तराखंड सरकार और संबंधित एजेंसियां इस मामले में क्या कदम उठाती हैं।