सरकारी दवा नीति पर बवाल: 611 दवाएं मुफ्त मिलने के फैसले के खिलाफ आंदोलन की तैयारी, बिहार केमिस्ट एसोसिएशन का ऐलान
सरकारी अस्पतालों में 611 प्रकार की आवश्यक दवाओं को निःशुल्क उपलब्ध कराने की नीति को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। जहां एक ओर सरकार इस योजना को आम मरीजों के लिए राहतकारी कदम बता रही है, वहीं दवा कारोबार से जुड़े संगठनों ने इसके खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है।
बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष परसन सिंह ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि दवा कारोबारी पहली बार किसी लाभ या हानि से इतर केंद्र सरकार की दवा विक्रय नीति के खिलाफ आंदोलन करने जा रहे हैं। उनके अनुसार यह नीति दवा बाजार और वितरण व्यवस्था पर गहरा असर डाल सकती है।
परसन सिंह का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में दवाओं की मुफ्त आपूर्ति से निजी दवा विक्रेताओं के कारोबार पर असर पड़ेगा और यह पूरे सप्लाई चेन सिस्टम को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की नीतियां बिना पर्याप्त संवाद और समीक्षा के लागू की जा रही हैं, जिससे दवा कारोबारियों में असंतोष बढ़ रहा है।
वहीं दूसरी ओर, सरकार का पक्ष है कि 611 आवश्यक दवाओं की मुफ्त आपूर्ति का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद मरीजों को राहत देना है, ताकि उन्हें इलाज के दौरान दवाओं के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ न उठाना पड़े। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यह कदम सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करेगा और इलाज को अधिक सुलभ बनाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि मुफ्त दवा नीति से सरकारी अस्पतालों में मरीजों की निर्भरता बढ़ेगी, लेकिन इसके साथ ही दवा वितरण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाना भी जरूरी होगा, ताकि किसी भी तरह की कमी या दुरुपयोग की स्थिति न बने।
दवा कारोबार से जुड़े संगठनों का यह भी कहना है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने सरकार से इस नीति की समीक्षा और सभी हितधारकों से बातचीत की मांग की है।
फिलहाल, इस मुद्दे ने स्वास्थ्य नीति और दवा वितरण व्यवस्था को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। सरकार जहां इसे जनहित का कदम बता रही है, वहीं दवा व्यापारी संगठन इसे अपने व्यवसाय पर प्रतिकूल असर डालने वाला निर्णय मान रहे हैं।