गया का तिलकुट, मिथिला का मखाना और सिलाव खाजा; राष्ट्रपति तो लाम के भोज में दिखी भारत की स्वाद विविधता
Tô Lâm के सम्मान में आयोजित राजकीय भोज में बिहार की पारंपरिक मिठाइयों और कृषि उत्पादों ने खास आकर्षण बटोरा। Gaya Tilkut, Mithila Makhana और Silao Khaja जैसे प्रसिद्ध उत्पादों ने भारत की समृद्ध स्वाद विविधता और सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश की। इस विशेष आयोजन में बिहार के GI-टैग प्राप्त उत्पादों को प्रमुखता दिए जाने से स्थानीय कारीगरों और किसानों में भी उत्साह देखा गया।
जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रपति तो लाम के भारत दौरे के दौरान आयोजित भोज में भारतीय व्यंजनों के साथ बिहार की पारंपरिक मिठाइयों और कृषि उत्पादों को विशेष रूप से शामिल किया गया। इसका उद्देश्य विदेशी मेहमानों को भारत की विविध खाद्य संस्कृति से परिचित कराना था।
गया का तिलकुट अपनी पारंपरिक विधि और खास स्वाद के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। तिल और गुड़ से तैयार होने वाली यह मिठाई विशेष रूप से सर्दियों में पसंद की जाती है। वहीं मिथिला का मखाना बिहार की पहचान बन चुका है। पोषण से भरपूर मखाना अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसके अलावा सिलाव का खाजा अपनी कुरकुरी परतों और मिठास के कारण लंबे समय से लोगों की पसंद बना हुआ है।
राजकीय भोज में इन उत्पादों को शामिल किए जाने को बिहार की सांस्कृतिक पहचान के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में स्थानीय उत्पादों को स्थान मिलने से उन्हें वैश्विक पहचान मिलती है और निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।
बिहार सरकार और स्थानीय प्रशासन ने इस अवसर को राज्य की पारंपरिक खाद्य विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण मौका बताया। भोज के मेन्यू में शामिल व्यंजनों और मिठाइयों को विशेष तरीके से तैयार किया गया था, ताकि विदेशी मेहमान भारतीय स्वाद और परंपरा का अनुभव कर सकें।
स्थानीय व्यापारियों और मिठाई कारोबारियों ने भी खुशी जताई है। उनका कहना है कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिहार के उत्पादों को सम्मान मिलता है, तो इससे छोटे व्यवसायियों और किसानों को भी लाभ पहुंचता है। कई कारोबारियों को उम्मीद है कि इससे बिहार के GI-टैग उत्पादों की मांग और बढ़ेगी।
सोशल मीडिया पर भी भोज के मेन्यू और बिहार की पारंपरिक मिठाइयों को लेकर चर्चा तेज रही। लोग इसे बिहार की सांस्कृतिक और पाक विरासत के लिए गर्व का क्षण बता रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की असली ताकत उसकी सांस्कृतिक और स्वाद विविधता में छिपी है। अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक व्यंजन देश की पहचान को वैश्विक मंच पर मजबूत करते हैं। राष्ट्रपति तो लाम के सम्मान में आयोजित इस भोज ने एक बार फिर भारत की इसी विविधता को दुनिया के सामने प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया।