जमीन की गलत सर्किल दर पर रजिस्ट्री कराने वालों पर कसेगा शिकंजा, अब 4 साल तक होगी जांच; लगेगा 100% जुर्माना
राज्य में जमीन की रजिस्ट्री में होने वाली राजस्व चोरी पर सरकार ने सख्त रुख अपनाने की तैयारी कर ली है। अब गलत सर्किल दर के आधार पर संपत्ति की रजिस्ट्री करवाकर स्टांप ड्यूटी और अन्य शुल्क में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों की जांच अवधि को बढ़ाकर अब 4 साल किया जाएगा, जबकि पहले यह अवधि केवल 2 साल तक सीमित थी।
सरकार के इस फैसले का उद्देश्य उन लोगों पर लगाम लगाना है, जो जानबूझकर जमीन की वास्तविक कीमत छिपाकर कम मूल्यांकन करवाते हैं और इससे राजस्व को नुकसान पहुंचाते हैं। नए प्रावधानों के तहत यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी व्यक्ति ने संपत्ति की सही कीमत छिपाकर रजिस्ट्री कराई है, तो उसे भारी जुर्माना भरना पड़ेगा।
राजस्व चोरी के बराबर लगेगा जुर्माना
नए नियमों के अनुसार, संपत्ति की कीमत कम दिखाकर राजस्व चोरी करने वालों से चोरी की गई राशि के बराबर ही जुर्माना वसूला जाएगा। यानी यदि किसी व्यक्ति ने रजिस्ट्री में कम कीमत दर्शाकर जितने राजस्व की चोरी की है, उतनी ही राशि का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जाएगा। यह जुर्माना 100 प्रतिशत तक हो सकता है।
इस कदम से सरकार का उद्देश्य राजस्व विभाग को होने वाले आर्थिक नुकसान को रोकना और जमीनों के वास्तविक मूल्यांकन को सुनिश्चित करना है।
पुराने मामलों की भी हो सकती है जांच
जांच की अवधि बढ़ने से अब ऐसे मामलों की पड़ताल का दायरा भी बढ़ जाएगा। पहले अधिकारी केवल पिछले दो वर्षों के मामलों की जांच कर सकते थे, लेकिन अब चार साल पुराने मामलों को भी जांच के दायरे में लाया जा सकेगा। इससे उन लोगों पर कार्रवाई संभव होगी, जिन्होंने लंबे समय से गलत सर्किल दर के आधार पर जमीनों की खरीद-बिक्री की है।
रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की तैयारी
राजस्व विभाग का मानना है कि इस बदलाव से जमीनों के पंजीयन में पारदर्शिता आएगी। कई मामलों में देखा गया है कि बाजार मूल्य और सरकारी सर्किल दर में अंतर का फायदा उठाकर कुछ लोग संपत्ति की कीमत कम दर्शाते हैं। इससे सरकार को मिलने वाले स्टांप शुल्क और अन्य राजस्व में कमी आती है।
नए प्रावधान लागू होने के बाद रजिस्ट्री कराने वाले लोगों को संपत्ति का सही मूल्य बताना अनिवार्य होगा। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम ईमानदारी से जमीन खरीदने-बेचने वालों के हित में भी है, क्योंकि इससे बाजार में गलत मूल्यांकन और अनियमितताओं पर रोक लगेगी।
सरकार अब राजस्व चोरी रोकने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड, ऑनलाइन निगरानी और सख्त जांच प्रक्रिया पर भी जोर दे रही है। आने वाले समय में जमीनों की रजिस्ट्री में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई और तेज होने की संभावना है।