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बिहार विधानसभा का बजट सत्र शुरू, सरकार और विपक्ष के बीच पहले दिन ही टकराव

 

बिहार विधानसभा का बजट सत्र सोमवार, 2 फरवरी से शुरू हो गया है और यह 27 फरवरी तक चलेगा। सत्र की शुरुआत ही सरकार और विपक्ष के टकराव के बीच हुई, जो आगामी दिनों में और भी राजनीतिक बहस का केंद्र बनने की संभावना है।

पहले दिन विधानसभा में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया गया। इसमें राज्य की वित्तीय स्थिति, राजस्व और विकास परियोजनाओं का विस्तृत विवरण दिया गया। वित्त मंत्री ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण राज्य की विकास योजनाओं और बजटीय प्रावधानों का मार्गदर्शन करता है। इसमें विभिन्न क्षेत्रों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और बुनियादी ढांचे में किए गए खर्च और निवेश का विवरण भी शामिल है।

सत्र का मुख्य आकर्षण 3 फरवरी को प्रस्तुत होने वाला राज्य का बजट होगा। बजट में आगामी वित्तीय वर्ष के लिए राज्य सरकार की योजनाओं, निवेश और राजस्व प्रावधानों की रूपरेखा पेश की जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बजट न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी इसे विधानसभा और जनता दोनों ही बड़े ध्यान से देखेंगे।

विपक्ष ने सत्र की शुरुआत से ही सरकार को घेरने की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्य विपक्षी दलों का कहना है कि वे NEET छात्रा रेप-मौत मामले, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय विकास जैसे कई संवेदनशील मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेंगे। विपक्ष का यह भी कहना है कि वे बजट सत्र का उपयोग जनता के सामने सरकार की कार्यक्षमता और नीतियों को उजागर करने के लिए करेंगे।

सत्र के दौरान विधानसभा की कार्यवाही कड़ी सुरक्षा और व्यवस्थित संचालन के तहत हो रही है। सभागार में सभी सदस्यों के बैठने की व्यवस्था और मतदान प्रक्रिया को सुनिश्चित किया गया है। इसके अलावा, मीडिया और जनता के लिए भी उचित व्यवस्था की गई है, ताकि सत्र की कार्यवाही पारदर्शी और खुले तौर पर देखी जा सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि बजट सत्र में आमतौर पर राजनीतिक टकराव और बहसें आम होती हैं, लेकिन यह राज्य के वित्तीय और विकास एजेंडा के लिए आवश्यक प्रक्रिया है। आर्थिक सर्वेक्षण और बजट पेश करने के साथ ही सरकार को अपनी योजनाओं और उपलब्धियों को विधानसभा में स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना होता है।

स्थानीय नागरिक और मीडिया इस सत्र पर विशेष नजर रखे हुए हैं, क्योंकि बजट और आर्थिक सर्वेक्षण के माध्यम से आने वाले वर्ष की राजनीतिक और आर्थिक दिशा का संकेत मिलता है। नागरिकों की अपेक्षा है कि बजट सत्र में उठाए गए मुद्दों पर पारदर्शिता और जवाबदेही दिखाई जाए।

इस प्रकार, बिहार विधानसभा का बजट सत्र न केवल वित्तीय और विकासीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सरकार और विपक्ष के बीच संवाद और लोकतांत्रिक बहस का भी प्रमुख मंच बन गया है। आने वाले दिनों में विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दे और सरकार की प्रतिक्रिया इस सत्र को विधानसभा इतिहास में विशेष महत्व देंगे।