11 महीने पहले आई बोट, अब तक शुरू नहीं हो सकी वाटर मेट्रो सेवा; गंगा में चार्जिंग स्टेशन नहीं बनने से प्रोजेक्ट अटका
पटना में गंगा नदी के रास्ते यातायात सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की जाने वाली वाटर मेट्रो सेवा अभी तक यात्रियों के लिए उपलब्ध नहीं हो पाई है। करीब 11 महीने पहले वाटर मेट्रो की बोट पटना पहुंच चुकी है, लेकिन जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार नहीं होने के कारण इसका संचालन शुरू नहीं हो सका है।
जानकारी के अनुसार कंगन घाट से दीघा के बीच वाटर मेट्रो चलाने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए इलेक्ट्रिक बोट मंगाई गई थी, लेकिन गंगा नदी में चार्जिंग स्टेशन का निर्माण नहीं होने से परियोजना में लगातार देरी हो रही है। इलेक्ट्रिक बोट के संचालन के लिए चार्जिंग सुविधा सबसे जरूरी है, जिसके बिना नियमित सेवा शुरू करना संभव नहीं है।
वाटर मेट्रो परियोजना का उद्देश्य पटना के लोगों को सड़क जाम से राहत देना और गंगा के रास्ते तेज व सुविधाजनक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। कंगन घाट से दीघा तक का रूट शहर के महत्वपूर्ण हिस्सों को जोड़ने में मदद करेगा। इससे यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन माध्यम मिलेगा और सड़क यातायात का दबाव भी कम होने की उम्मीद है।
अधिकारियों के मुताबिक चार्जिंग स्टेशन सहित अन्य तकनीकी व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद ही वाटर मेट्रो का ट्रायल और नियमित संचालन शुरू किया जाएगा। फिलहाल बोट को सुरक्षित स्थान पर रखा गया है और परियोजना से जुड़े बाकी कामों को जल्द पूरा करने की तैयारी चल रही है।
गंगा में इलेक्ट्रिक बोट चलाने के लिए घाटों पर जरूरी सुविधाएं विकसित करना भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। यात्रियों के चढ़ने-उतरने के लिए बेहतर व्यवस्था, सुरक्षा उपकरण और संचालन से जुड़ी तकनीकी तैयारियां पूरी होने के बाद ही सेवा को हरी झंडी मिल पाएगी।
वाटर मेट्रो शुरू होने से पटना के पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। गंगा किनारे स्थित प्रमुख घाटों तक पहुंच आसान होगी और स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी एक नया परिवहन विकल्प मिलेगा।
हालांकि, बोट आने के बावजूद करीब एक साल तक सेवा शुरू नहीं हो पाने से परियोजना की गति पर सवाल उठ रहे हैं। अब सभी की नजरें चार्जिंग स्टेशन निर्माण और अन्य तैयारियों पर हैं, ताकि जल्द ही गंगा में वाटर मेट्रो का संचालन शुरू हो सके।