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50 हजार दुग्ध उत्पादकों के खाते में जल्द पहुंचेगी राशि, चरणबद्ध तरीके से 7 लाख किसानों को मिलेगा लाभ

 

दुग्ध उत्पादकों को आर्थिक राहत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रदेश के हजारों दूध उत्पादकों को जल्द ही उनके खाते में राशि मिलनी शुरू हो जाएगी। योजना के पहले चरण में इस महीने के अंत तक आठों दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों के माध्यम से करीब 50 हजार दूध उत्पादकों के बैंक खातों में राशि भेजी जाएगी।इसके बाद योजना का विस्तार करते हुए चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के 22 हजार 416 दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों से जुड़े 7 लाख से अधिक दूध उत्पादकों को इसका लाभ दिया जाएगा।

पहले चरण में 50 हजार उत्पादकों को मिलेगा लाभ

योजना के तहत शुरुआत में सभी जिलों से जुड़े दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों को शामिल किया गया है। पहले चरण में करीब 5 हजार दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों से जुड़े 50 हजार दूध उत्पादकों के खाते में राशि ट्रांसफर की जाएगी।अधिकारियों के अनुसार, इसके लिए संबंधित संघों के स्तर पर तैयारियां पूरी की जा रही हैं। लाभार्थियों के बैंक खातों की जानकारी और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करने का काम भी किया जा रहा है।

लाखों पशुपालकों को मिलेगा फायदा

दूध उत्पादन से जुड़े किसान और पशुपालक ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। ऐसे में सीधे बैंक खातों में राशि पहुंचने से उन्हें आर्थिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।योजना के अगले चरणों में अधिक से अधिक दुग्ध उत्पादकों को जोड़ने की तैयारी है। लक्ष्य है कि प्रदेश के सभी पात्र दूध उत्पादकों तक इसका लाभ पहुंचाया जा सके।

सहकारी संघों के माध्यम से होगा भुगतान

राशि वितरण की पूरी प्रक्रिया दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों के माध्यम से की जाएगी। प्रदेश में आठ प्रमुख दुग्ध संघों के जरिए अलग-अलग जिलों के दूध उत्पादकों को योजना से जोड़ा जा रहा है।सहकारी व्यवस्था के जरिए भुगतान करने से प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

दूध उत्पादन को बढ़ावा देने की पहल

सरकार का मानना है कि इस तरह की योजनाओं से पशुपालकों का भरोसा बढ़ेगा और दूध उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। आर्थिक सहायता मिलने से किसान पशुओं के बेहतर रखरखाव, चारे और अन्य जरूरतों पर अधिक खर्च कर सकेंगे।ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार दूध उत्पादन से जुड़े हैं। ऐसे में लाखों उत्पादकों को मिलने वाली यह सहायता उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

चरणबद्ध तरीके से जुड़ेगा पूरा नेटवर्क

पहले चरण के बाद योजना को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया जाएगा। आने वाले समय में 7 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादकों को इसमें शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।इस पहल से प्रदेश के दुग्ध क्षेत्र को मजबूती मिलने के साथ ही सहकारी आंदोलन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य है कि दुग्ध उत्पादकों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उनकी आय और उत्पादन क्षमता में सुधार किया जा सके।