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दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय का 5वां दीक्षांत समारोह, राज्यपाल बोले- डिग्री के साथ राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी भी

 

दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय में पांचवें दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग बताया। उन्होंने कहा कि डिग्री हासिल करना केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि इसके साथ राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी भी आती है। विद्यार्थियों को अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज और देश की प्रगति के लिए करना चाहिए।

दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। इस अवसर पर छात्र-छात्राएं अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद नए लक्ष्यों की ओर कदम बढ़ाते हैं। राज्यपाल ने शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारियों के महत्व पर जोर दिया।

गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति की पहचान

राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण विरासत बताया। भारतीय परंपरा में गुरु की भूमिका केवल किताबी ज्ञान देने तक सीमित नहीं रही है, बल्कि वे विद्यार्थियों को जीवन के मूल्य, अनुशासन और सही दिशा चुनने की सीख भी देते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को अपने शिक्षकों से प्राप्त ज्ञान और मार्गदर्शन का सम्मान करने तथा उसे जीवन में अपनाने का संदेश दिया। शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना या डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनना भी है।

डिग्री के साथ राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी

राज्यपाल ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद उनकी जिम्मेदारी केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। शिक्षित युवा अपने ज्ञान, प्रतिभा और कौशल से देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

अनुसंधान, तकनीक, नवाचार, शिक्षा, प्रशासन और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में युवाओं का योगदान राष्ट्र निर्माण को गति दे सकता है। इसके लिए ईमानदारी, मेहनत और समाज के प्रति संवेदनशीलता जरूरी है।

उच्च शिक्षा से समाज को मिलेगी नई दिशा

विश्वविद्यालय ज्ञान, अनुसंधान और नए विचारों के विकास के प्रमुख केंद्र होते हैं। यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी समाज की समस्याओं का समाधान खोजने और सकारात्मक बदलाव लाने में योगदान दे सकते हैं।

दीक्षांत समारोह में राज्यपाल के संबोधन का मुख्य संदेश विद्यार्थियों को उनकी उपलब्धियों के साथ भविष्य की जिम्मेदारियों का अहसास कराना रहा। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका के महत्व को रेखांकित किया।

विद्यार्थियों के लिए नई शुरुआत

दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय का पांचवां दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव होने के साथ नई शुरुआत का अवसर भी है। डिग्री प्राप्त करने के बाद विद्यार्थी अपने ज्ञान और कौशल के जरिए समाज तथा देश के विकास में योगदान दे सकते हैं।

समारोह में कितने विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं, कितने स्वर्ण पदक दिए गए और अन्य कौन-कौन से अतिथि उपस्थित रहे, इसकी विस्तृत जानकारी मिलने पर खबर को और विस्तार दिया जा सकता है।