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तेज प्रताप यादव ने RJD एमएलसी सुनील सिंह पर साधा निशाना, कहा- “मेरे पिता के रहमो करम पर खड़ा है”

 

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर राजनीतिक विवाद ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने पार्टी के एमएलसी सुनील सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया दी है। तेज प्रताप ने स्पष्ट किया कि सुनील सिंह उनके पिता लालू प्रसाद यादव के रहमो करम पर खड़ा है और उसके पास मेरे सामने खड़ा होने की हैसियत नहीं है।

तेज प्रताप यादव ने यह प्रतिक्रिया तब दी जब सुनील सिंह ने पार्टी और परिवार के भीतर कुछ विवादित बयान दिए थे। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान RJD के भीतर नेतृत्व और प्रभाव को लेकर चल रहे मतभेदों को उजागर करता है। तेज प्रताप यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पार्टी और परिवार के अंदर आपसी विवाद को बढ़ावा देना ठीक नहीं है और किसी को भी अपने वरिष्ठ नेताओं और परिवार के प्रति सम्मान बनाए रखना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि लालू प्रसाद यादव की भूमिका और योगदान पार्टी और बिहार के राजनीतिक इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसलिए किसी भी पार्टी सदस्य को उनके खिलाफ बयान देने या उन्हें चुनौती देने की स्थिति में नहीं होना चाहिए। तेज प्रताप यादव ने जोर देकर कहा कि वे अपने पिता के नाम और सम्मान की रक्षा करेंगे और किसी भी सदस्य के अनुचित व्यवहार को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि RJD के भीतर यह विवाद आगामी चुनावों और पार्टी के नेतृत्व संरचना पर असर डाल सकता है। वे बताते हैं कि तेज प्रताप यादव और उनके भाई तेजस्वी यादव के बीच सत्ता और पार्टी संचालन को लेकर संतुलन बनाने की जद्दोजहद चल रही है। इस तरह के बयान इस राजनीतिक समीकरण को और जटिल बना सकते हैं।

सुनील सिंह की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि मामले की आंतरिक समीक्षा की जा रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि परिवार और पार्टी के बीच ऐसे विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से हल करना आवश्यक है, ताकि संगठनात्मक और राजनीतिक स्थिरता बनी रहे।

विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार की राजनीति में परिवारिक राजनीति का प्रभाव काफी गहरा है। ऐसे विवाद केवल मीडिया और जनता के ध्यान में आते हैं, बल्कि पार्टी के अंदरूनी कामकाज और निर्णय प्रक्रिया पर भी असर डालते हैं। तेज प्रताप यादव का यह बयान पार्टी के भीतर अनुशासन और नेतृत्व का संदेश भी माना जा रहा है।

राजनीतिक पंडितों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में RJD के भीतर और बयानबाजी और सार्वजनिक विवाद हो सकता है। इस स्थिति को देखते हुए पार्टी नेतृत्व को इसे शांतिपूर्ण और रणनीतिक ढंग से हल करना होगा, ताकि चुनाव और संगठन पर नकारात्मक असर न पड़े।

अंततः, तेज प्रताप यादव और सुनील सिंह के बीच यह विवाद RJD के भीतर सत्ता संतुलन और परिवारिक राजनीति के जटिल समीकरण को उजागर करता है। तेज प्रताप यादव का बयान स्पष्ट संदेश देता है कि उनके पिता के योगदान और सम्मान के खिलाफ किसी भी सदस्य के पास बोलने या चुनौती देने का अधिकार नहीं है। अब नजरें इस विवाद के अगले चरण और पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर टिक गई हैं।