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3 से 6 साल के बच्चों में बढ़ रहे बिहेवियर डिसऑर्डर के लक्षण, छोटी उम्र में ही दिख रहा चिड़चिड़ापन और गुस्सा

 

बच्चों में व्यवहार संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ती नजर आ रही हैं। पहले जिन लक्षणों को आमतौर पर किशोरावस्था में देखा जाता था, अब वे तीन से छह साल की उम्र के बच्चों में भी दिखाई देने लगे हैं। इनमें छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ाना, बार-बार गुस्सा करना, जिद पकड़ लेना और बात-बात पर विरोध करना जैसे लक्षण शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कम उम्र में ऐसे व्यवहार का लगातार दिखाई देना चिंता का विषय हो सकता है।

बिहेवियर डिसऑर्डर यानी व्यवहार संबंधी विकार से प्रभावित बच्चों की संख्या बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। बच्चों के व्यवहार में बदलाव को कई बार माता-पिता सामान्य जिद या शरारत समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, जब बच्चा लगातार गुस्सा करता है, छोटी-छोटी बातों पर आक्रामक हो जाता है या अपनी बात मनवाने के लिए असामान्य व्यवहार करता है, तो इस पर ध्यान देना जरूरी है।

कम उम्र में दिखने लगे लक्षण

तीन से छह साल की उम्र बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस दौरान बच्चे अपने आसपास के माहौल से काफी कुछ सीखते हैं और अपनी भावनाओं को व्यक्त करना शुरू करते हैं। ऐसे में कभी-कभार जिद करना या गुस्सा दिखाना सामान्य हो सकता है, लेकिन यदि यह व्यवहार लगातार बना रहे और बच्चे की रोजमर्रा की गतिविधियों, पढ़ाई या दूसरे बच्चों के साथ मेलजोल को प्रभावित करने लगे, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी हो सकता है।

माता-पिता की भूमिका अहम

बच्चों के व्यवहार में बदलाव को समझने में माता-पिता की भूमिका महत्वपूर्ण है। बच्चे के साथ समय बिताना, उसकी बात ध्यान से सुनना और गुस्सा करने पर उसे डांटने के बजाय शांत तरीके से समझाना मददगार हो सकता है। साथ ही, बच्चों के सामने घर का माहौल शांत और सकारात्मक बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए।

समय पर पहचान जरूरी

बिहेवियर डिसऑर्डर के लक्षणों को समय रहते पहचानना जरूरी है। यदि बच्चा लंबे समय तक अत्यधिक चिड़चिड़ापन, गुस्सा, जिद या आक्रामकता दिखाता है, तो बाल मनोवैज्ञानिक या संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। सही समय पर पहचान और उचित मार्गदर्शन से बच्चे को अपनी भावनाओं और व्यवहार को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिल सकती है।