मुजफ्फरपुर में अंधविश्वास का कहर: ‘डायन’ के आरोप में बुजुर्ग की पीट-पीटकर हत्या, गांव में तनाव
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से अंधविश्वास और सामाजिक कुरीति का एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां ‘डायन’ होने के शक में एक बुजुर्ग व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और ग्रामीणों में भय व आक्रोश का माहौल है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब गांव में कुछ लोगों ने एक महिला पर डायन होने का आरोप लगाते हुए उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। पीड़िता के साथ हो रही इस हिंसा को देखकर उसका पति उसे बचाने के लिए आगे आया। लेकिन स्थिति और बिगड़ गई जब कथित तौर पर गांव के कुछ दबंगों ने बुजुर्ग व्यक्ति को भी निशाना बना लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दबंगों ने बुजुर्ग व्यक्ति को बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया और उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। लगातार मारपीट के कारण बुजुर्ग की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई और लोग सहमे हुए नजर आए।
सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। साथ ही मामले की जांच शुरू कर दी गई है और कुछ संदिग्धों से पूछताछ भी की जा रही है।
यह दर्दनाक घटना एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में फैले अंधविश्वास और ‘डायन प्रथा’ जैसी कुप्रथाओं की गंभीरता को उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा और जागरूकता की कमी के कारण आज भी कई इलाकों में इस तरह की घटनाएं देखने को मिलती हैं, जो समाज के लिए बेहद खतरनाक हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मृतक व्यक्ति शांत स्वभाव का था और उसका किसी से कोई विवाद नहीं था। बावजूद इसके, अंधविश्वास के चलते उसे अपनी जान गंवानी पड़ी। घटना के बाद मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और उन्होंने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। कई लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है और दोषियों की पहचान की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि 21वीं सदी में भी अंधविश्वास और कुप्रथाएं क्यों लोगों की जान ले रही हैं, और समाज को इससे बाहर निकालने के लिए कितनी बड़ी जागरूकता की जरूरत है।