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सुधा डेयरी में 100 करोड़ से ज्यादा के घोटाले का आरोप, रिश्तेदारों की गाड़ियां बिना टेंडर लगाईं

 

सुधा डेयरी से जुड़े मामले में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के कथित घोटाले का आरोप सामने आया है। आरोप है कि डेयरी में नियमों को दरकिनार कर कई तरह की खरीद और सेवाओं में अनियमितताएं की गईं। इनमें रिश्तेदारों के नाम पर चलने वाली गाड़ियों को बिना टेंडर लगाए जाने से लेकर महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान की खरीद तक के मामले शामिल बताए जा रहे हैं।

मामले में सामने आई जानकारी के मुताबिक, डेयरी के कामकाज में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। आरोप है कि कुछ वाहनों को टेंडर प्रक्रिया के बिना ही काम पर लगाया गया। इन गाड़ियों के मालिकों के डेयरी से जुड़े अधिकारियों या कर्मचारियों से रिश्ते होने की बात भी सामने आई है।

बिना टेंडर रिश्तेदारों की गाड़ियां लगाने का आरोप

सुधा डेयरी में वाहन उपलब्ध कराने के लिए आमतौर पर निर्धारित प्रक्रिया और टेंडर व्यवस्था का पालन किया जाता है। हालांकि, आरोप है कि कुछ मामलों में इस प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए सीधे गाड़ियां लगाई गईं।

इनमें कुछ वाहन ऐसे लोगों के बताए जा रहे हैं, जिनका संबंध डेयरी से जुड़े अधिकारियों या कर्मचारियों के रिश्तेदारों से है। इससे वाहन किराए पर लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जांच में इस बात की भी पड़ताल की जा रही है कि इन वाहनों को कितने समय तक इस्तेमाल किया गया और इसके बदले कितना भुगतान किया गया।

एप्पल का लैपटॉप खरीदा, इस्तेमाल बाहरी व्यक्ति ने किया

मामले में एक एप्पल लैपटॉप की खरीद भी चर्चा में है। आरोप है कि डेयरी के पैसे से महंगा लैपटॉप खरीदा गया, लेकिन उसका इस्तेमाल किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा किया गया। इससे खरीद की जरूरत और लैपटॉप के वास्तविक उपयोग को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

जांच में यह देखा जा सकता है कि लैपटॉप किस उद्देश्य से खरीदा गया था, इसे किसके नाम पर दर्ज किया गया और वास्तव में इसका इस्तेमाल कौन करता था। साथ ही खरीद प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं, इसकी भी जांच किए जाने की बात कही जा रही है।

100 करोड़ से ज्यादा की अनियमितताओं का आरोप

पूरे मामले में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। हालांकि, इस रकम और कथित घोटाले से जुड़े सभी आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

मामले में वाहन, खरीद, भुगतान और अन्य वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

सुधा डेयरी से जुड़े इस मामले ने सरकारी और सहकारी संस्थानों में खरीद प्रक्रिया और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल पूरे मामले में सामने आए आरोपों की जांच और दस्तावेजों के आधार पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।