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रिमेडियल क्लास में विद्यार्थियों को दी बाल मजदूरी की जानकारी, जागरूकता का दिया संदेश

 

रिमेडियल क्लास के दौरान विद्यार्थियों को बाल मजदूरी के दुष्प्रभावों और इससे जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ संवेदनशील बनाना था।

इस अवसर पर वक्ताओं ने बताया कि बाल मजदूरी न केवल बच्चों के बचपन को छीनती है, बल्कि उनके शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा प्राप्त करने और सुरक्षित वातावरण में विकसित होने का अधिकार है। ऐसे में समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह बाल श्रम को रोकने में अपनी भूमिका निभाए।

रिमेडियल क्लास में छात्रों को बताया गया कि सरकार ने बाल मजदूरी पर रोक लगाने के लिए विभिन्न कानून बनाए हैं। 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से मजदूरी करवाना कानूनन अपराध है। यदि कहीं भी बाल श्रम होता दिखाई दे तो इसकी सूचना संबंधित विभाग या प्रशासन को देनी चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को उदाहरणों और गतिविधियों के माध्यम से समझाया गया कि शिक्षा ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत नींव है। बच्चों ने भी बाल मजदूरी के खिलाफ अपने विचार व्यक्त किए और इसे समाप्त करने के लिए जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

अंत में उपस्थित विद्यार्थियों से अपील की गई कि वे अपने आसपास बाल मजदूरी जैसी घटनाओं पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। कार्यक्रम का मुख्य संदेश था कि हर बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार है तथा बाल मजदूरी मुक्त समाज के निर्माण में सभी को सहयोग करना चाहिए।